हनुमानजी ने रामायन लिखि थी जब सीता जी का त्याग करके श्रीराम अकेले हो गए तो,
हनुमान जी को अपने प्रभु का दुःख देखा नहीं जाता था। वे श्रीराम की सेवा कर एकांतवास में जाते ओैर अपने वज्र
नाखून से शीलाओं पर श्रीराम चरित्र लिखते थें ।
श्रीरामचरित्र लिखने के बाद उन्होंने महर्षि वाल्मीकि को उसे बताया। वाल्मीकि के मन में यह भाव आ गया कि यदि
हनुमानजी की भावना प्रधान रामायण लोगों के सामने आ गई तो मेरी रामायण को कौन पढे़गा?
हनुमान उनकी भावनाओं को समझ गए और कहा कि वाल्मीकिजी रामायण तो आपकी ही लोग पढेंगे यह कहकर
हनुमानजी ने अपनी लिखि रामायण शीलाओं को सागर में फेक दिया ।
उनके इस त्याग से वाल्मीकि और आहत हुए, उनके नेत्रों में आंसू आ गए और उन्होंने कहा कि हनुमान मैं फिर कलयुग में
तुलसी बनकर जन्म लूंगा और ऐसी रामायण की रचना करूंगा जो भावना प्रधान हो।
*सुरेखा भारती
हनुमान जी को अपने प्रभु का दुःख देखा नहीं जाता था। वे श्रीराम की सेवा कर एकांतवास में जाते ओैर अपने वज्र
नाखून से शीलाओं पर श्रीराम चरित्र लिखते थें ।
श्रीरामचरित्र लिखने के बाद उन्होंने महर्षि वाल्मीकि को उसे बताया। वाल्मीकि के मन में यह भाव आ गया कि यदि
हनुमानजी की भावना प्रधान रामायण लोगों के सामने आ गई तो मेरी रामायण को कौन पढे़गा?
हनुमान उनकी भावनाओं को समझ गए और कहा कि वाल्मीकिजी रामायण तो आपकी ही लोग पढेंगे यह कहकर
हनुमानजी ने अपनी लिखि रामायण शीलाओं को सागर में फेक दिया ।
उनके इस त्याग से वाल्मीकि और आहत हुए, उनके नेत्रों में आंसू आ गए और उन्होंने कहा कि हनुमान मैं फिर कलयुग में
तुलसी बनकर जन्म लूंगा और ऐसी रामायण की रचना करूंगा जो भावना प्रधान हो।
*सुरेखा भारती
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