वाह ससुर जी
बहु जुही आफिस से आ सासु माँ आभा जी से चहकती हुई कहती है," माँ आपकी भाकरवड़ी सबको
बहुत
पसंद आई।आपके हाथों में तो कमाल है।
" कमरदर्द से कराहती आभा रात के खाने के लिए सब्जियां बनाने में जुट जाती है।
वो तो भला हो रनिया का कि दोनों वक्त रोटियां सेक देती है। बहु भी सीखना चाहती है।परंतु जब सब कुछ तैयार ही
जाता है तो कौन मेहनत कर शेखर जी से पत्नी की हालत देखी नहीं जाती।
एक दिन खाने की मेज़ पर ऐलान कर देते हैं, " कल से पूरा खाना रनिया ही बनाएगी। " अगले दिन बहु को खाना
बिलकुल रास नहीं आता और वह कहती है," मम्मी के हाथ बनी सब्ज़ियों का तो जवाब नहीं।
" शेखर बहु को समझाइश देने का मौका नहीं चूकते, " अरे बेटा, छुट्टी वाले दिनों में सीख लो अपनी मम्मी से और रनिया
को भी सिखादो।मम्मी को अब आराम की जरूरत है।" जुही सकुचाते हुए बोली, " जी पापा।"
*
बहुत
पसंद आई।आपके हाथों में तो कमाल है।
" कमरदर्द से कराहती आभा रात के खाने के लिए सब्जियां बनाने में जुट जाती है।
वो तो भला हो रनिया का कि दोनों वक्त रोटियां सेक देती है। बहु भी सीखना चाहती है।परंतु जब सब कुछ तैयार ही
जाता है तो कौन मेहनत कर शेखर जी से पत्नी की हालत देखी नहीं जाती।
एक दिन खाने की मेज़ पर ऐलान कर देते हैं, " कल से पूरा खाना रनिया ही बनाएगी। " अगले दिन बहु को खाना
बिलकुल रास नहीं आता और वह कहती है," मम्मी के हाथ बनी सब्ज़ियों का तो जवाब नहीं।
" शेखर बहु को समझाइश देने का मौका नहीं चूकते, " अरे बेटा, छुट्टी वाले दिनों में सीख लो अपनी मम्मी से और रनिया
को भी सिखादो।मम्मी को अब आराम की जरूरत है।" जुही सकुचाते हुए बोली, " जी पापा।"
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