Thursday, April 9, 2020

संकटमोचन रामभक्त की मैं बचपन से आराधना करती आई हूँ।

मेरे छोटे भाई ,जो अब हमारे साथ नही है ,शारीरिक रूप से कमजोर थे ,

 हनुमान जी की नित्य आराधना किया करते थे।हनुमान चालीसा उन्हें कंठस्थ थी व बड़ी ही तन्मयता से गाया करते थे।

एक बार जब वे बहुत बीमार हुए ,आश्चर्यजनक रूप से स्वस्थ हो गए।डॉक्टर भी अचंभित थे।

बाद में उन्होंने बताया कि हनुमानजी स्वयं मेरे पास आए और मुझे आशीर्वाद दिया।

इस घटना के बाद हम हनुमानजी के परम भक्त हो गए।

उनकी आराधना का ही फल है कि हम विषम परिस्थितियों में भी

हिम्मत न हारते हुए हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करते आए हैं।

* अचला गुप्ता इंदौर

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