27मई2020भोपाल
*प्रिय बिटिया ज्योति*
*
अपार स्नेह*
*इस लॉकडाउन में मैंने रामायण और महाभारत धारावाहिक
देखें। उनसे मुझे सीख मिली कि कैसी भी स्थितियाँ हो हमें अपने परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहना चाहिए। यदि
आप देश ,समाज* *एवं परिवार का हाथ दृढ़ता से थामते हैं, तो युगों-युग तक आपको सम्मान मिलता रहता है* ।
*ज्योति इन दोनों पवित्र ग्रंथों की सीख को आपने अपने जीवन में धारण ही नहीं किया अपितु उसका प्रत्यक्ष प्रमाण भी
दिया है।आपने हर चिंता को छोड़,केवल परिवार की चिंता की। आप कलयुग की श्रवण कुमारी हो ।इस आपदा* *में घर
की सीढ़ी लांघते हुए हमारे पैर कांपने लगते हैं तो आपको उन वीरान सूनी सड़को पर रात्रि के घोर अंधकार में डर नहीं
लगा? तपती धूप में बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर गुरूग्राम से दरभंगा तक की यात्रा आपने कैसे कर ली? जब
आप अपने गन्तव्य की ओर बढ़ रही थी तो किशोरवय की चंचलता आप* *कहाँ छोड़ आई थी? आपके साहस को
अभिनंदन करते हैं। आज विश्व की हर नारी आपके साथ है ।आपने इस यात्रा के माध्यम से जीवन- यात्रा के लिए अपने
देश की बेटियों को संदेश दिया है कि कैसी भी स्थिति रहे हमें अपना साहस नहीं खोना है। अपने अधिकार के लिए*
*लड़ना है रिश्ते के परदे के पीछे छिपे अपमान को नहीं सहना है। हर क्षेत्र में साहस के साथ आगे बढ़ना है। बेटी हमें
आप पर गर्व है*। *एक बात है ज्योति यदि सोनू सूद भैया को यह बात पता चलती तो वह कभी आपको ऐसी
कठिन,साहसिक यात्रा पर अकेले नहीं जाने देते।भाई तो होते ही है बहनों की रक्षा के लिए। भारतमाता भी आप जैसी
दोनों सन्तानों को पाकर गर्व कर रही होंगी।अभिनन्दन, अभिनन्दन ।जय भारत,जय हिंद*।
*आपकी प्रशंसक* *मीना जैन (भोपाल)*
अपार स्नेह*
*इस लॉकडाउन में मैंने रामायण और महाभारत धारावाहिक
देखें। उनसे मुझे सीख मिली कि कैसी भी स्थितियाँ हो हमें अपने परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहना चाहिए। यदि
आप देश ,समाज* *एवं परिवार का हाथ दृढ़ता से थामते हैं, तो युगों-युग तक आपको सम्मान मिलता रहता है* ।
*ज्योति इन दोनों पवित्र ग्रंथों की सीख को आपने अपने जीवन में धारण ही नहीं किया अपितु उसका प्रत्यक्ष प्रमाण भी
दिया है।आपने हर चिंता को छोड़,केवल परिवार की चिंता की। आप कलयुग की श्रवण कुमारी हो ।इस आपदा* *में घर
की सीढ़ी लांघते हुए हमारे पैर कांपने लगते हैं तो आपको उन वीरान सूनी सड़को पर रात्रि के घोर अंधकार में डर नहीं
लगा? तपती धूप में बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर गुरूग्राम से दरभंगा तक की यात्रा आपने कैसे कर ली? जब
आप अपने गन्तव्य की ओर बढ़ रही थी तो किशोरवय की चंचलता आप* *कहाँ छोड़ आई थी? आपके साहस को
अभिनंदन करते हैं। आज विश्व की हर नारी आपके साथ है ।आपने इस यात्रा के माध्यम से जीवन- यात्रा के लिए अपने
देश की बेटियों को संदेश दिया है कि कैसी भी स्थिति रहे हमें अपना साहस नहीं खोना है। अपने अधिकार के लिए*
*लड़ना है रिश्ते के परदे के पीछे छिपे अपमान को नहीं सहना है। हर क्षेत्र में साहस के साथ आगे बढ़ना है। बेटी हमें
आप पर गर्व है*। *एक बात है ज्योति यदि सोनू सूद भैया को यह बात पता चलती तो वह कभी आपको ऐसी
कठिन,साहसिक यात्रा पर अकेले नहीं जाने देते।भाई तो होते ही है बहनों की रक्षा के लिए। भारतमाता भी आप जैसी
दोनों सन्तानों को पाकर गर्व कर रही होंगी।अभिनन्दन, अभिनन्दन ।जय भारत,जय हिंद*।
*आपकी प्रशंसक* *मीना जैन (भोपाल)*

Very nice 👌
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteहम सब ज्योति के साथ हैं।
ReplyDeleteअति सुंदर एवं हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति ।
ReplyDeleteधन्यवाद जी
Deleteबहुत ही हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति है । आपका लेख सराहनीय है ।
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