.........अमीर मजदूर"..........
(लघुकथा)💐
सदा के पिता राज मजदूर थे।घर मे आठ सदस्य थे,सदा सबसे बड़ा भाई था।सदा सहित तीन भाई स्कूल जाते थे इन सबका खर्च और दो जून की रोटी जुटाना पिता के लिए बोहोत मुश्किल होता था।जिस दिन सदा आठवी पास हुआ पिता ने कहा-"बेटा अब तुम पढ़ाई छोड़ो और काम करो!" पिता की आज्ञा सिर झुकाकर शिरोधार्य की और वह राज मजदूरी करने लगा। बहुत जल्दी बड़े मकान,बंगले,इमारतें बनाने लगा।शांत-गम्भीर स्वभाव,चिंतन की आदत ने उसकी मननशीलता को पूरा अवसर दिया।काम करते वक़्त उसके मन मस्तिष्क में सरस्वती जाग्रत रहती।विद्या व विद्यालय से बिछड़ने का दर्द हमेशा रहा।वह घर आकर कलम उठता साहित्य की छोटी-छोटी विधाओं में सुंदर रचना करता और सुबह फिर करनी-रन्दा हाथ मे लेकर मजदूरी पर चल देता। इसी बीच विवाह हो गया,स्वयं की गृहस्थी हो गई।पत्नी भी पति के साथ बराबरी से साथ देती।सिलाई में भिड़कर गृहस्थी की गाड़ी खींचने लगी।अरसे की तपस्या के बाद उत्तरोत्तर लक्ष्मी औऱ सरस्वती दोनो प्रसन्न होती चली गई।स्वयं का एक बंगला अपने हाथों से दोनों ने बना लिया।गुणों की सुगंध दूर-दूर तक फैल गई।जो सिर्फ सदा थे और हमेशा स्वयं को मजदूर कहते थे अब सदाशिव के नाम से पहचाने जाने लगे।आज अपने जीवन कि सच्चाई और कटू अनुभवों का शब्दो के माध्यम से पूरे परिवार की वर्तमान पीढ़ी के सामने चित्र उपस्थित कर रहे है।अचानक छोटा पोता गले से लिपटकर रोते हुए बोला-"वाह!दादू आप तो हीरो हो ,अमीर मजदूर!"बहु और सब बच्चे भाव विभोर हो दादी से लिपट गए।दादी की एक सिसकी निकली और वह अपने पति सदा से बोली-सुनो जी-"आज हम दुनिया के सबसे अमीर मजदूर हो गए।जब हमारे अपने भावुक है।
" माधुरी व्यास"नवपमा"💐
(लघुकथा)💐
सदा के पिता राज मजदूर थे।घर मे आठ सदस्य थे,सदा सबसे बड़ा भाई था।सदा सहित तीन भाई स्कूल जाते थे इन सबका खर्च और दो जून की रोटी जुटाना पिता के लिए बोहोत मुश्किल होता था।जिस दिन सदा आठवी पास हुआ पिता ने कहा-"बेटा अब तुम पढ़ाई छोड़ो और काम करो!" पिता की आज्ञा सिर झुकाकर शिरोधार्य की और वह राज मजदूरी करने लगा। बहुत जल्दी बड़े मकान,बंगले,इमारतें बनाने लगा।शांत-गम्भीर स्वभाव,चिंतन की आदत ने उसकी मननशीलता को पूरा अवसर दिया।काम करते वक़्त उसके मन मस्तिष्क में सरस्वती जाग्रत रहती।विद्या व विद्यालय से बिछड़ने का दर्द हमेशा रहा।वह घर आकर कलम उठता साहित्य की छोटी-छोटी विधाओं में सुंदर रचना करता और सुबह फिर करनी-रन्दा हाथ मे लेकर मजदूरी पर चल देता। इसी बीच विवाह हो गया,स्वयं की गृहस्थी हो गई।पत्नी भी पति के साथ बराबरी से साथ देती।सिलाई में भिड़कर गृहस्थी की गाड़ी खींचने लगी।अरसे की तपस्या के बाद उत्तरोत्तर लक्ष्मी औऱ सरस्वती दोनो प्रसन्न होती चली गई।स्वयं का एक बंगला अपने हाथों से दोनों ने बना लिया।गुणों की सुगंध दूर-दूर तक फैल गई।जो सिर्फ सदा थे और हमेशा स्वयं को मजदूर कहते थे अब सदाशिव के नाम से पहचाने जाने लगे।आज अपने जीवन कि सच्चाई और कटू अनुभवों का शब्दो के माध्यम से पूरे परिवार की वर्तमान पीढ़ी के सामने चित्र उपस्थित कर रहे है।अचानक छोटा पोता गले से लिपटकर रोते हुए बोला-"वाह!दादू आप तो हीरो हो ,अमीर मजदूर!"बहु और सब बच्चे भाव विभोर हो दादी से लिपट गए।दादी की एक सिसकी निकली और वह अपने पति सदा से बोली-सुनो जी-"आज हम दुनिया के सबसे अमीर मजदूर हो गए।जब हमारे अपने भावुक है।
" माधुरी व्यास"नवपमा"💐

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