Sunday, May 17, 2020

ग़जल

 *ऐ ख़ुदा हर तरफ मौत- खाना हुआ*

 *आफ़तों का कहां कब ठिकाना हुआ*

 *आज फिर जां गई एक इंसान की*

*सिलसिला-ए -कयामत पुराना हुआ*

 *वार पर वार कर ,खत्म हो जाय ना*

 *ये सहनशीलता आज़माना हुआ*


 *चांद से भेज दे इक मसीहा हमें*

 *बंद इंसान मिलना- मिलाना हुआ*

 *हो गया ये शहर आज वीरान सा*

*भीड़ देखें हुए इक ज़माना ‌ हुआ*

 *लोग पथरा गए राह तकते हुए*

 *सांवरे का जमीं पर न आना हुआ*

 *जानती है 'सुमन' भौर फिर आयगी*

*कब निशा का सदा शामियाना हुआ*

👉 सीमा शिवहरे सुमन

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