प्रतिकृति हूँ मैं तुम्हारी ,
है तुम्ही से ये अस्तित्व मेरा ,
हिंदीसों की पहचान से आगे
रस्तों के हर नाम के आगे पढ़ना
सीखा है तुम्ही से मैंने ,
जीवन के अनगिनत रंग
तुम्हारी आँखों से ही देखें हैं मैंने ,
जीवन मूल्यों की राहों पर
नैतिकता और सत्य का पाठ
----- भी सीखा है तुमसे ही ,
मेरे हर पल के हलफ़नामे पर
दस्तख़त हैं तुम्हारे ,
महसूस करती हूँ तुम्हे
अपने आस - पास ही
करती हूँ जब दीदार हर उस
खूबसूरत मंजर का
जो था तुम्हारे दिल के करीब
दुआ करती हूँ ना दुखे
दिल कभी किसी माँ का ,
स्रष्टा का उपहार है ये अमूल्य --- माँ
शालनी रायजदा
शालनी रायजदा

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