Saturday, May 9, 2020

प्रतिकृति हूँ मैं तुम्हारी , है तुम्ही से ये अस्तित्व मेरा , हिंदीसों की पहचान से आगे रस्तों के हर नाम के आगे पढ़ना सीखा है तुम्ही से मैंने , जीवन के अनगिनत रंग तुम्हारी आँखों से ही देखें हैं मैंने , जीवन मूल्यों की राहों पर नैतिकता और सत्य का पाठ ----- भी सीखा है तुमसे ही , मेरे हर पल के हलफ़नामे पर दस्तख़त हैं तुम्हारे , महसूस करती हूँ तुम्हे अपने आस - पास ही करती हूँ जब दीदार हर उस खूबसूरत मंजर का जो था तुम्हारे दिल के करीब दुआ करती हूँ ना दुखे दिल कभी किसी माँ का , स्रष्टा का उपहार है ये अमूल्य --- माँ

शालनी रायजदा 

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