प्रिय प्रणय
मेरा गोल मटोल लड्डू
कब घर में सभी से लम्बा हो गया मुझे पता ही नहीं चला । मेरा बेन टेन अब सोलह साल का सुपर कंप्यूटर हो गया है ।
मेरे ' मिस्टर कूल ' मैं चाहती हूँ तुम हमेशा ऐसे ही रहो । नंबर्स या रैंकिंग से तुम्हेँ कोई फर्क नहीं पड़ता है , तुम अपनी
पढ़ाई जश्न के रूप में करते हो और उसीमे खुश होते हो। न तुम्हें अपने पापा की उम्मीदों पर खरा उतरना है और न ही
अपनी मम्मी की इच्छा पूरी करनी है , बस खुद को खुश करना है । और तुम्हारी ख़ुशी में मैं खुश हूँ । गर्व या उम्मीद ये
शब्द हमारे बीच नहीं रहेंगे , रहेगी सिर्फ तुम्हारी ख़ुशी ।
तुम्हारी माँ
मीता पंडित
मेरा गोल मटोल लड्डू
कब घर में सभी से लम्बा हो गया मुझे पता ही नहीं चला । मेरा बेन टेन अब सोलह साल का सुपर कंप्यूटर हो गया है ।
मेरे ' मिस्टर कूल ' मैं चाहती हूँ तुम हमेशा ऐसे ही रहो । नंबर्स या रैंकिंग से तुम्हेँ कोई फर्क नहीं पड़ता है , तुम अपनी
पढ़ाई जश्न के रूप में करते हो और उसीमे खुश होते हो। न तुम्हें अपने पापा की उम्मीदों पर खरा उतरना है और न ही
अपनी मम्मी की इच्छा पूरी करनी है , बस खुद को खुश करना है । और तुम्हारी ख़ुशी में मैं खुश हूँ । गर्व या उम्मीद ये
शब्द हमारे बीच नहीं रहेंगे , रहेगी सिर्फ तुम्हारी ख़ुशी ।
तुम्हारी माँ
मीता पंडित

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