Saturday, May 9, 2020

(कविता मर गई है)👇👇🤔🤫🌚

 शब्द तो शब्द है, वे कब किसके है।

 न तेरे है, न मेरे है, भरोसा मत करना।

 ये मेरे लिए नहीं है, न ही तुम्हारे लिए।
शब्द बस इशारें है, कि, सुनो दिल की।। 
प्रेम झूठ, दुनिया में, सारी दुनिया झूठी।
जो सच्ची होती तो, मुझसे रूठती तुम ?
सुनो,कभी न कहना, ये मेरे लिए है, ना।
समझ लेना इतना, ये केवल कविता है।
 कुछ नहीं दुनिया में, कविता मर गई यहां।
हम तुम जिंदा अभी, प्रेम मरा नहीं है,क्यूं ? आंखों की झील में, गहरा था पानी। कविता छोड़ दी, लिख दी कहानी। कैसी आज़ादी ? शब्दों से खेलना, कोई खेल है क्या ? शब्द शहंशाह है। जमाने में कौन है, हमसे है जमाना। सुनो,अब मत कहना ये मेरे लिए है,ना। समझ लेना चाहे जो, पर मत बदलना, तुम। तुम जैसे हो, वैसे रहना, कविता मर गई है। 🖋🖋🖋🖋

कृष्ण चतुर्वेदी बूंदी, राजस्थान।

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