ममतामयी मूरत तेरी सीरत लिख दु,
क्यों न माँ आज तुझे ये खत लिख दु..
तुझसे ही मायके की रौनक है लिख दु,
क्यों न माँ आज तुझे ये खत लिख दु....
स्याही के संग छलक रहे ये अश्क लिख दु,
क्यो न माँ आज तुझे ये खत लिख दु..
तेरी लड़खड़ाती जुबा के पूरे शब्द लिख दु,
क्यों न माँ आज तुझे ये खत लिख दु..
.. तेरे आँचल में जो हैं सारा सुकून लिख दु, क्यों न माँ आज तुझे ये खत लिख दु...
. बच्चों के लिए तेरा त्याग समर्पण लिख दु, क्यो न माँ आज तुझे ये खत लिख दु.....
कविता सक्सेना शुजालपुर
क्यों न माँ आज तुझे ये खत लिख दु..
तुझसे ही मायके की रौनक है लिख दु,
क्यों न माँ आज तुझे ये खत लिख दु....
स्याही के संग छलक रहे ये अश्क लिख दु,
क्यो न माँ आज तुझे ये खत लिख दु..
तेरी लड़खड़ाती जुबा के पूरे शब्द लिख दु,
क्यों न माँ आज तुझे ये खत लिख दु..
.. तेरे आँचल में जो हैं सारा सुकून लिख दु, क्यों न माँ आज तुझे ये खत लिख दु...
. बच्चों के लिए तेरा त्याग समर्पण लिख दु, क्यो न माँ आज तुझे ये खत लिख दु.....
कविता सक्सेना शुजालपुर

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