सोते नहीं, तूफां समुंदर,
सोती नहीं देशप्रेमी की आत्मा,
ये न सोचो पत्ता हिला नहीं,
तो दूर है तेरा खात्मा।
बीज कितने भी
बोले, आतंकी साये में तू डोले, चैन से बैठेंगे न जब तक चुका न लेंगे कीमत शहादत, हंतवाड़ा हमले मे एक एक जवान
की, एकता कैसी है होती, एक झलक तू देख लेना, देख लेना, सौगंध हिन्दुस्तान की। याद हैं, माताओं के आंसू, याद हैं
सिंदूर जो उजड़े, कुछ थे रोते, कुछ बिलखते, गली, पुरवा, खेड़े के मुखड़े, नामोनिशान अब मिटा देगें, सांस रोककर ही
चैन लेगें, लगा देगें कतार, श्मशान की। एकता कैसी है होती, एक झलक तू देख लेना, देख लेना, सौगंध हिन्दुस्तान की।
आज मुल्क एका से खड़ा है, सैनिक शहादत राजधर्म से बड़ा है, मिटा देगें तेरा समूल मुखौटा, जो एक चांटा तूने धोखे से
जड़ा है। अपनी किस्मत को टटोल ले, तू एक हो जा या बिखर ले, समुंदर, तूफां, सैलाब की ज्वाला मे जलेगा, धज्जियां
उडे़गी, तेरे अरमान की। एकता कैसी है होती, एक झलक तू देख लेना, देख लेना, सौगंध हिन्दुस्तान की।
राजेश कुमार लखेरा, जबलपुर।
बोले, आतंकी साये में तू डोले, चैन से बैठेंगे न जब तक चुका न लेंगे कीमत शहादत, हंतवाड़ा हमले मे एक एक जवान
की, एकता कैसी है होती, एक झलक तू देख लेना, देख लेना, सौगंध हिन्दुस्तान की। याद हैं, माताओं के आंसू, याद हैं
सिंदूर जो उजड़े, कुछ थे रोते, कुछ बिलखते, गली, पुरवा, खेड़े के मुखड़े, नामोनिशान अब मिटा देगें, सांस रोककर ही
चैन लेगें, लगा देगें कतार, श्मशान की। एकता कैसी है होती, एक झलक तू देख लेना, देख लेना, सौगंध हिन्दुस्तान की।
आज मुल्क एका से खड़ा है, सैनिक शहादत राजधर्म से बड़ा है, मिटा देगें तेरा समूल मुखौटा, जो एक चांटा तूने धोखे से
जड़ा है। अपनी किस्मत को टटोल ले, तू एक हो जा या बिखर ले, समुंदर, तूफां, सैलाब की ज्वाला मे जलेगा, धज्जियां
उडे़गी, तेरे अरमान की। एकता कैसी है होती, एक झलक तू देख लेना, देख लेना, सौगंध हिन्दुस्तान की।
राजेश कुमार लखेरा, जबलपुर।

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