*मातृ दिवस पर पटल पर उपस्थित समस्त मातृशक्ति को नमन करते हुए.....
* *मत भेद करो माँ संतानों मैं,* *जो अजन्मी है या अजन्मा है...
* *लिंगभेद का तुम धिक्कार करो माँ,* *सहर्ष स्वीकार करो जिसे अभी जनना है !* *मत भेद करो माँ सृजन मैं,* *सृष्टि की अनुदित जो रचना है...* *
कर्ज़ है माता का तुम पर,* *जिसने उम्मीदों से तुम्हें जन्मा है...*
*मत भेद करो माँ अधिकारों में,* *सृष्टि ने अधिकृत कर उसे जनना है !
* *कमतर ना समझो बेटी को,* *रचे हैं इतिहास कई और आगे भी रचना है !
* *मत नष्ट करो माँ कन्या भ्रूण,* *ठान लो उसे अब जनना ही जनना है !
* *मत भेद करो मां संतानों में...* *जो अजन्मी है और अजन्मा है !
* *- संजय राष्ट्रवादी*
* *मत भेद करो माँ संतानों मैं,* *जो अजन्मी है या अजन्मा है...
* *लिंगभेद का तुम धिक्कार करो माँ,* *सहर्ष स्वीकार करो जिसे अभी जनना है !* *मत भेद करो माँ सृजन मैं,* *सृष्टि की अनुदित जो रचना है...* *
कर्ज़ है माता का तुम पर,* *जिसने उम्मीदों से तुम्हें जन्मा है...*
*मत भेद करो माँ अधिकारों में,* *सृष्टि ने अधिकृत कर उसे जनना है !
* *कमतर ना समझो बेटी को,* *रचे हैं इतिहास कई और आगे भी रचना है !
* *मत नष्ट करो माँ कन्या भ्रूण,* *ठान लो उसे अब जनना ही जनना है !
* *मत भेद करो मां संतानों में...* *जो अजन्मी है और अजन्मा है !
* *- संजय राष्ट्रवादी*

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