Tuesday, May 26, 2020

'
पाती पिता की' प्रतियोगिता हेतु मेरी रचना -- 🙏


पाती पिता की 🙏

 पूज्यनीय पिताजी , सादर चरण स्पर्श ,

आज जब मैं आपसे इतनी दूर किसी दूसरे शहर में नौकरी कर रहा हूँ , अब मुझे जीवन के इस पथ पर पल - पल आपकी शिक्षा और याद आ रही । काश कि आपने मुझे अपने स्नेह की छाया में रखकर पढ़ाया - लिखाया नहीं होता तो मैं आज कहीं का नहीं होता । वास्तव में वो आपकी कठोरता नहीं आपका प्यार था जिसे मैं अब जान पाया । आज मैं आपको याद करते हुए एक गीत लिख रहा हूँ , कागज़ पे मेरी क़लम चल रही है और भावनाओं में डूबी हुई मेरी अँखियों से अश्रुधार ,जो इस ख़त के कागज़ को गीला कर रही है । पर सच तो ये कि ये ख़ुशी के आँसू हैं , पिताजी मैं आपको सौ सौ नमन करता हूँ । 🙏पापा तुमसा कोई न प्यारा🙏 मन्दिर, मस्ज़िद और गुरुद्वारा साधू सन्त ज्योतिष का द्वारा जा जाकर मैं हारा... पापा तुमसा कोई न प्यारा पापा तुमसा.....। नहीं मैं समझा रूप तुम्हारा, छिपा क्रोध में प्यार तुम्हारा । करूणामयी है हृदय तुम्हारा , तुमसे शोभित घर है सारा । आपकी मेहनत से सँवरा , आज ये भाग्य हमारा... पापा तुमसा....। ख़ुद न खाकर हमें खिलाया , जो भी मांगा हमें दिलाया । अँगुली पकड़कर चलना सिखाया , जीवन पथ हमको दिखलाया । छाँव बने तुम सिर पे हमारे धूप में दिया सहारा .... पापा तुमसा .....। भूल हमारी बहुत हैं पापा , क्षमा तुम्हरा गुण है पापा । बहुत सताया हमने तुमको , गले लगाया तुमने हमको ।

जनम - जनम तक तुमको पाऊँ पुत्र बनूँ मैं



तुम्हारा.... पापा तुमसा....। -- सुरेन्द्र सिंह राजपूत 'हमसफ़र' मोब. - 98269 29480 LIG सी 6/25 आवास नगर

 मक्सी रोड़ देवास (मध्यप्रदेश) पिन -- 455001

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