Saturday, May 2, 2020

सती और सीता, हे तो मृत्यु। पति के ईश्वर के भी बाद यू।


 क्यो? किसलिए। देवियां कब तक पवित्रता का प्रमाण दे।

और जग क्यो नही इन महिलाओ का साथ दे।

 बताओ, किस लिए, क्यो मरने वाली नारियो की तस्वीरे बनाई जाती है। जगह जगह मंदिर बनाकर वे पुजी जाती है।

क्यो जीवित थी तो नही अपनाया गया। और यूं मरने को विवश हे छोडा गया। आज भी प्रश्न नही किसी नर के पास।

हर हाल मे समाज का लेकर वह हे नाम।

कब तक। क्यो वही मरती रहेगी। कभी कोख मे, कभी परी रूप मे, कभी दहेज मे, या कभी दुष्कर्म मे।

 क्यो वह जी नही पाती है। मानव कौ जन्मदेने वाली असहाय बन जाती है।

और.समाज ही इसका दोषी होता। वही नारियो पर हरदम शक करता। वही रूलाता, वही मसलता, वही मारता है।

 और फिर झूठे आंसू बहाकर रोता है। बंद करो ये इस तरह नारियो पर अत्याचारः सीधे ,सरल ,तरीके से उसे पालो और

ब्याह करो। और पुज लो जीते जी, मानव बन जाओ।

श्रीमती ममतावैरागी तिरला धार

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