Saturday, May 2, 2020

*मजदूर*

 रघुबीर मल्टी नेशनल कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों के साथ *मजदूरी* का काम करता था लेकिन जीवन निर्वाह करने के लिए साहूकार से कुछ पैसे उधारी लेने के कारण उन रुपयों को चुकाने के लिए रात को पार्ट टाइम काम करता था बेहद थक जाता था। आये दिन साहूकार अपने पैसे मांगता रहता था कहता था कि जल्दी से पैसे चुका दो वरना अब आगे से पैसे नही दूंगा...... रघुबीर आखिर क्या करता दिन रात *मजदूरी* करने के बाद भी पैसे सिर्फ खाने पीने में ही चले जाते थे तो साहूकार ने उसे सलाह मशवरा दिया ........ रेलवे स्टेशन में पटरी पर जाकर लेट जा और आत्महत्या करने का नाटक करना ताकि तुम्हारे कंपनी के अधिकारी तुम्हें पार्ट टाइम का पैसा दें ..... रघुबीर ने वैसा ही किया रेलवे स्टेशन पर जाकर पटरी के बीच लेट गया और आत्महत्या का नाटक करने लगा कुछ कर्मचारियों को पता चला तो वे बड़े अधिकारियों को जाकर बतलाये ..... अधिकारी ने कहा -कुछ सुरक्षा कर्मियों को लेकर जाओ और उसे पकड़ कर ले आओ ।रघुबीर को पकड़ने की बहुत कोशिश की लेकिन वह पटरी पर पड़े हुए पत्थरों से मारने लगा था अब अधिकारियों ने कहा - ऐसा करो ट्रेन आने वाली है जहां रघुबीर बैठा हुआ है वहाँ कुछ दूरी पर एक व्यक्ति लाल रंग का कपड़ा लहराते खड़े रहे ....ताकि रेलगाड़ी को कुछ समय तक रोका जा सके और कुछ व्यक्ति अपने साथ टिन का टुकड़ा ले जाकर अपना बचाव करते हुए रघुबीर को पकड़ कर लाया जा सके ..... अधिकारियों के आदेशानुसार कुछ सुरक्षा कर्मियों ने रघुबीर को पकड़ने में कामयाब रहे .... अब उन्होंने कहा कि उसकी खूब पिटाई करो ताकि सच्चाई जाहिर करे और उसे छोड़ दो । सुरक्षा गार्ड ने ऐसा ही किया उसकी खूब पिटाई कर छोड़ दिया वह घर पहुंचा घर के लोग उसकी यह दशा देखकर हैरान हो गए आखिर रघुबीर को क्या हुआ .... दूसरे दिन रघुबीर की पत्नी कंपनी के अधिकारी के पास अपनी शिकायत लेकर पहुंची ..कहने लगी मेरे पति को सुरक्षा कर्मियों ने पकड़कर खूब पिटाई की है ये अच्छा नही किया उन्हें कड़ी सजा सुनाई जाय....... रघुबीर की पत्नी की सारी बातें सुनकर अधिकारी ने कहा पहले आप रघुबीर से सच्चाई पूछिये वह रेलवे स्टेशन पर पटरी पर लेटकर आत्महत्या करने जा रहा था आखिर क्यों ......? ? रघुबीर ने साहूकार के सलाह मशवरे की पूरी घटना का वर्णन करते हुए सभी के सामने अपनी गलतियों को कबूल किया। साहूकार के बहकावे में आकर गलत कदम उठा रहा था सभी अधिकारियों ने उसकी सच्चाई को सुनकर चौंक गए और रघुबीर की गलतियों को स्वीकार कर प्रायश्चित करने से उसे कंपनी में कर्मचारियों के साथ काम करने के लिए पदोन्नति दिलाकर उनके परिवार जनों की भी आर्थिक सहायता प्रदान की गई ........ आखिर मेहनतकश मजदूर वर्ग अपने खून पसीने की कमाई से ही परिवार का भरण पोषण करता है। *पसीने की हर बून्द दिखलाती है हाथों की लकीरें बतलाती है वे हम सभी के जीवन मे खुशियां भरते नये रूप में विश्वकर्मा बन जाते हैं*

 *शशिकला व्यास* ✍️

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