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नेशन वांट स टू नो एक दिन शहर घूमते हुए मुझे महसूस हुआ कि कहीं भी कोई गरीबी रेखा के नीचे वाला दिखाई नहीं दे रहा। मै एकदम चौंक गई कही गरीबी हटाने के चक्कर में गरीबों को ही तो नहीं हटा दिया? यह ख्याल आया ही था कि सामने के मैदान में सारी भीड़ दिख गई। वहां एक टूटा फूटा मंच था। वहीं से एक आदमी गुस्से से बोल रहा था" भाइयों और बहनों, आप लोग जानते ही हो कि हम आज यहां क्यों एकत्रित हुए हैं। इन नेताओ ने '"गरीबी रेखा" बना रखी है । और आज हम लोग इनके लिए "अमीरी रेखा" बनाएंगे। जरा हम भी तो देखे कि अमीरी रेखा के नीचे कोन कोन से नेता आते है।" तभी भीड़ मेसे एक आवाज आई"पर हम "अमीरी रेखा"का पैमाना क्या बनाएंगे? इन लोगों ने तो हमारे पेट को पैमाना बनाकर गरीबी रेखा बना दी। कोई कहता है२२.५०पैसे में पेट भरता है । कोई कहता है२७ रुपए में तो कोई कहता है ३२ रुपए में।"। तभी एक और आवाज आई "अरे योजना आयोग के अनुसार तो जो व्यक्ति २२.५० पैसे ख़र्च कर सकता है वह गरीब नहीं माना जाएगा। और ये आकलन उन लोगो ने किया है जो अपनी विदेश यात्रा के दौरान लाखों रुपए रोजाना खर्च करते है।" तभी एक महिला भी बोल पड़ी "पर रामजी ने तो सबका पेट एकसा बनाया है।" यह सुनकर मंच से तुरन्त आवाज आई "रामजी को बीच में मत लाओ। ये कोई नेताओ कि चुनावी सभा नहीं है ।" तभी तीसरा आदमी चिल्लाया "तो ठीक है हम भी उनके पेट को ही पैमाना बना लेते है।" यह सुनते ही मा इक से जोरदार आवाज आई"बावले हो गए हो क्या? अरे हम उनके पेट को नहीं ले सकते। उसमे पता नहीं क्या क्या समाया है। चारा घोटाला, कोयला घोटाला, बोफोर्स खनन, व्यापम, रेलवे टेंडर, मद्यान भोजन, मतलब ए टू जेड घोटाले।" फिर एक आवाज आई" तो ऐसा करते हैं की उनके हाथों को पैमाना बना लेते हैं।" लेकिन मंच से आवाज आई "फिर वही नादानी। तुमने सुना है न कि कानून के हाथ लंबे होते है। पर इनके हाथ तो कानून से भी लंबे होते हैं। तभी तो जेल में ठाठ से रहते है। बीमारी का बहाना बनाकर जनता के रुपयों से जेलों में रहते हुए अच्छे अच्छे अस्पतालों में इलाज करवा लेते हैं। हाथ लंबे होते है इसीलिए जेल से बाहर आकर चुनाव भी जीत लेते हैं।" "तो ऐसा करते हैं की दिमाग को पैमाना बना लेते है।"। " वह भी नहीं कर सकते भाई, उनका दिमाग इतना शातिर होता कि कब, कहा, कैसे पार्टी बदलना है सब समझता है।"उन सबका वार्तालाप चल ही रहा था कि मेरी नींद खुल गई। अब एक प्रश्न सचमुच मेरे दिमाग में घूम रहा है कि नेताओं कि अमीरी रेखा होनी चाहिए। जनता को भी तो मालूम होना चाहिए कि कोन सा नेता अमीरी रेखा के नीचे है और कोन सा अमीरी रेखा के ऊपर। लेकिन नेताओ के लिए अमीरी रेखा खींचना हो तो क्या पैमाना होना चाहिए____कितने बीघे जमीन है? कितनी कोठियां है, कितना सोना, चांदी, हिरे ,जवारहत या कितना दबदबा है.... या और क्या? आप लोग ये जिज्ञासा दूर कीजिए और अमीरी रेखा केसे खींची जाय ये बताईए
। जयहिंद
। । नियति sapre..
नेशन वांट स टू नो एक दिन शहर घूमते हुए मुझे महसूस हुआ कि कहीं भी कोई गरीबी रेखा के नीचे वाला दिखाई नहीं दे रहा। मै एकदम चौंक गई कही गरीबी हटाने के चक्कर में गरीबों को ही तो नहीं हटा दिया? यह ख्याल आया ही था कि सामने के मैदान में सारी भीड़ दिख गई। वहां एक टूटा फूटा मंच था। वहीं से एक आदमी गुस्से से बोल रहा था" भाइयों और बहनों, आप लोग जानते ही हो कि हम आज यहां क्यों एकत्रित हुए हैं। इन नेताओ ने '"गरीबी रेखा" बना रखी है । और आज हम लोग इनके लिए "अमीरी रेखा" बनाएंगे। जरा हम भी तो देखे कि अमीरी रेखा के नीचे कोन कोन से नेता आते है।" तभी भीड़ मेसे एक आवाज आई"पर हम "अमीरी रेखा"का पैमाना क्या बनाएंगे? इन लोगों ने तो हमारे पेट को पैमाना बनाकर गरीबी रेखा बना दी। कोई कहता है२२.५०पैसे में पेट भरता है । कोई कहता है२७ रुपए में तो कोई कहता है ३२ रुपए में।"। तभी एक और आवाज आई "अरे योजना आयोग के अनुसार तो जो व्यक्ति २२.५० पैसे ख़र्च कर सकता है वह गरीब नहीं माना जाएगा। और ये आकलन उन लोगो ने किया है जो अपनी विदेश यात्रा के दौरान लाखों रुपए रोजाना खर्च करते है।" तभी एक महिला भी बोल पड़ी "पर रामजी ने तो सबका पेट एकसा बनाया है।" यह सुनकर मंच से तुरन्त आवाज आई "रामजी को बीच में मत लाओ। ये कोई नेताओ कि चुनावी सभा नहीं है ।" तभी तीसरा आदमी चिल्लाया "तो ठीक है हम भी उनके पेट को ही पैमाना बना लेते है।" यह सुनते ही मा इक से जोरदार आवाज आई"बावले हो गए हो क्या? अरे हम उनके पेट को नहीं ले सकते। उसमे पता नहीं क्या क्या समाया है। चारा घोटाला, कोयला घोटाला, बोफोर्स खनन, व्यापम, रेलवे टेंडर, मद्यान भोजन, मतलब ए टू जेड घोटाले।" फिर एक आवाज आई" तो ऐसा करते हैं की उनके हाथों को पैमाना बना लेते हैं।" लेकिन मंच से आवाज आई "फिर वही नादानी। तुमने सुना है न कि कानून के हाथ लंबे होते है। पर इनके हाथ तो कानून से भी लंबे होते हैं। तभी तो जेल में ठाठ से रहते है। बीमारी का बहाना बनाकर जनता के रुपयों से जेलों में रहते हुए अच्छे अच्छे अस्पतालों में इलाज करवा लेते हैं। हाथ लंबे होते है इसीलिए जेल से बाहर आकर चुनाव भी जीत लेते हैं।" "तो ऐसा करते हैं की दिमाग को पैमाना बना लेते है।"। " वह भी नहीं कर सकते भाई, उनका दिमाग इतना शातिर होता कि कब, कहा, कैसे पार्टी बदलना है सब समझता है।"उन सबका वार्तालाप चल ही रहा था कि मेरी नींद खुल गई। अब एक प्रश्न सचमुच मेरे दिमाग में घूम रहा है कि नेताओं कि अमीरी रेखा होनी चाहिए। जनता को भी तो मालूम होना चाहिए कि कोन सा नेता अमीरी रेखा के नीचे है और कोन सा अमीरी रेखा के ऊपर। लेकिन नेताओ के लिए अमीरी रेखा खींचना हो तो क्या पैमाना होना चाहिए____कितने बीघे जमीन है? कितनी कोठियां है, कितना सोना, चांदी, हिरे ,जवारहत या कितना दबदबा है.... या और क्या? आप लोग ये जिज्ञासा दूर कीजिए और अमीरी रेखा केसे खींची जाय ये बताईए
। जयहिंद
। । नियति sapre..

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