Sunday, May 17, 2020

सत्य की पहचान शाश्वत सत्य हां मानव का आना और जाना है काल के आगे नहीं चलता किसी का कोई बहाना है आसींद ख्वाइशों को हम पूरी करते करते सुबह शाम और दिन रात हम घटते रहते पता ही नहीं चला उम्र कैसे निकल जाता है रेत की भांति मुट्ठी से फिसल जाता है शाश्वत सत्य यहां मानव का आना और जाना है काल के आगे नहीं चलता किसी का कोई बहाना है राग देस सिरसिया अकड़ से हम भरे रहते हैं जुबा से ऊंच-नीच सत्य असत्य ना जाने हम क्या क्या कहते हैं चार दिन की जिंदगी मिली है हमें सौगात में फिर भी हम रहते अपनी दिखावे की औकात में मनुष्य और मनुष्यता को हमने कभी पहचाना है शाश्वत सत्य यहां मानव का आना और जाना है काल की आगे नहीं चलता किसी का कोई बहाना है अजर अमर जहां वही हो जाते हैं जो खुद के संग और के लिए जी जाते हैं याद करती है दुनिया उनको फिर बसाती है दुनिया उनको वरना एक दिन तो सभी को धू धू कर जल जाना है शाश्वत सत्य हां मानव का आना और जाना है कॉल के आगे नहीं चलता किसी का कोई बहाना है


👉 डॉ बीना सिंह छत्तीसगढ़ सर्वाधिक सुरक्षित

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