पिताजी को पत्र 26/05/20
परम आदरणीय मेरे प्यारे पापा
सस्नेह याद,
अत्र कुशलम तत्रास्तु ।
आशा है आप भी मेरे
प्यारे भाई एवं भाभी के साथ मंगलमय होगें। आपसे रुबरु हुए काफी समय हो गया है।आपकी सदैव याद आती है।
आपसे मिलने का मन बहुत हो रहा है परन्तु इस लॉकडाउन के कारण संभव नही हो पा रहा है।आपके साथ बिताये
जीवन के उन अनमोल पलो को याद करती हूँ तो आँखे भीग जाती है। आपने हमें जीवन मे कैसे हर काम को पूरी लगन
मेहनत और सही ढंग से करना सिखाया।अपना आत्मविश्वास व आत्मबल हमेशा बनाये रखकर जीवन के पथ पर
सफलता के साथ सदैव अग्रसर होते रहे यही मंत्र बताया जो आज हमारे जीवन रूपी नैया को सुचारु रूप से चलाने में
अत्यंत सहायक सिध्द हो रही हैं। माँ के अचानक न रहने पर आपने जो माँ एवं पिता दोनों ही किरदार बखूबी निभाये
उनकी कमी कभी भी महसूस नही होने दी। आपने जो संस्कार मुझे दिए है उनको पूरी तरह निभाते हुए आगे बढ़ती जा
रही हूँ।बडो़ का आदर ,सम्मान और छोटो को प्यार देना आपने यही सीख दी है।दुनियादारी की हर रीत आपके मार्गदर्शन
और आशिर्वाद से निभाते हुएअपने कार्यो से सबको खुश रखने का प्रयास करती हूँ। आपका सानिध्य जल्दी ही मिलेगा ऐसी आशा है। बच्चे कभी भी माता -पिता के उऋण नही हो सकते है ।।मैं सदैव आपकी छत्रछाया में रहना चाहूँगी आपकी सेवा का मौका मुझे मिले यही विनती ईश्वर से करती हूँ।घर में सबको यथायोग्य पापा ।आप सदैव स्वस्थ ,सुखी एवं प्रसन्न रहें यही प्रार्थना है।
सदैव आपकी स्नेहाकांक्षी प्यारी बिटिया
🙏 वन्दना अर्गल (रानी)🙏
प्यारे भाई एवं भाभी के साथ मंगलमय होगें। आपसे रुबरु हुए काफी समय हो गया है।आपकी सदैव याद आती है।
आपसे मिलने का मन बहुत हो रहा है परन्तु इस लॉकडाउन के कारण संभव नही हो पा रहा है।आपके साथ बिताये
जीवन के उन अनमोल पलो को याद करती हूँ तो आँखे भीग जाती है। आपने हमें जीवन मे कैसे हर काम को पूरी लगन
मेहनत और सही ढंग से करना सिखाया।अपना आत्मविश्वास व आत्मबल हमेशा बनाये रखकर जीवन के पथ पर
सफलता के साथ सदैव अग्रसर होते रहे यही मंत्र बताया जो आज हमारे जीवन रूपी नैया को सुचारु रूप से चलाने में
अत्यंत सहायक सिध्द हो रही हैं। माँ के अचानक न रहने पर आपने जो माँ एवं पिता दोनों ही किरदार बखूबी निभाये
उनकी कमी कभी भी महसूस नही होने दी। आपने जो संस्कार मुझे दिए है उनको पूरी तरह निभाते हुए आगे बढ़ती जा
रही हूँ।बडो़ का आदर ,सम्मान और छोटो को प्यार देना आपने यही सीख दी है।दुनियादारी की हर रीत आपके मार्गदर्शन
और आशिर्वाद से निभाते हुएअपने कार्यो से सबको खुश रखने का प्रयास करती हूँ। आपका सानिध्य जल्दी ही मिलेगा ऐसी आशा है। बच्चे कभी भी माता -पिता के उऋण नही हो सकते है ।।मैं सदैव आपकी छत्रछाया में रहना चाहूँगी आपकी सेवा का मौका मुझे मिले यही विनती ईश्वर से करती हूँ।घर में सबको यथायोग्य पापा ।आप सदैव स्वस्थ ,सुखी एवं प्रसन्न रहें यही प्रार्थना है।
सदैव आपकी स्नेहाकांक्षी प्यारी बिटिया
🙏 वन्दना अर्गल (रानी)🙏

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