Tuesday, May 26, 2020

विधा।

 लघुकथा शीर्षक।

 ख़ुशी ईद मुबारक हो आज़ आमीन बहुत खुश था। उसने ऐसा खिताब जीता था जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर

सकता था। उसने शबा को आवाज लगाई।शबा भी दौड़ कर आई थी। आमीन उसका हाथ पकड़ नाचने लगा था। आठ

साल की उम्र में ही दुबई में रहने वाले माता-पिता ने उसे भारत में एक होस्टल में रख दिया था ।मुझे होस्टल में और इतना


दूर क्यों रखा गया इसका ज्ञान उसे नहीं था ।तब हुआ जब वह आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ गया था। दृढ़ता के साथ-साथ

आमीन ऊर रहमान ने अपना शैक्षणिक दर्जा स्वयं ही एम काम ,डीसिए, विडियो एडिटर जैसें आवश्यक प्रशिक्षण लेकर

बढ़ा लिए थे।। लाॅकडाउन के चलते आमीन ने विश्व भर में बसे अपने समाज के लोगों को महामारी के चलते जो

जागरूकता अभियान चलाया उस हेतु ह्रदय से दुआएं मिल रहीं है थी। बड़े बड़े महानुभावों के विद्वानों के भाषण इनकी

पूरी टीम विडियो के ज़रिए पहुंचाने का काम बखुबी निभा रही थी। गांवों में बसे बधिर स्वयं के साथ सबको बचाने में जुट

गये थे। स्वस्थ रहो मस्त रहो का नारा दिया जा रहा था। चार दिवारो के बीच बैठें अथक ,तटस्थ,दृढ़ आमीन को विश्व

बधिर एसोसिएशन की ओर से श्रेष्ठ सेवा सम्मान पुरस्कार प्राप्त हुआ था।जन्म सेअपनी मूक बधिरता को मात देने वाले

आमीन ने दुनिया के समस्त बधिर समाज को जंग जीतना है हारना नहीं हैं कहते ईद की मुबारक दी। आश्रु पुरित नेत्रो से

 बधिर शबा अपने पति की ओर देख रहीं थीं। आंतरिक खुशी ज़ाहिर करते हुए उसने भी ऊपर अल्लाह को याद कर हाथ उठा दिए थे।

*अमिता मराठे इन्दौर स्व रचित सत्य पर आधारित

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