
हमें तो याद रही है हमेशा से नानी के घर की गर्मी की छुट्टियाँ
नानी का धीरेसे, हौलेसे, प्यारसे होंठो पर हाथ रख आश्चर्य से बोल लाड़ करना
आमों की पाल से ,छांटकर चोल चख कर मीठा आम देना
बड़े मामा का चाट कचोरी पोहे हाथों से बना कर,अखबार की प्लेट में प्यारसे परोस खिलाना
बाज़ारों में दौड़ दौड़,अच्छे से अच्छा फल लाकर भर पेट खिलाना
ट मन मामा का धीरेसे आना,और फुसफुसाहट भरे अंदाज़ में बातें करना
और सबसे छोटे मामा का ,छोटा होते हुए भी नाना बन सब का ख्याल रखना
याद आते है वो खंडवा के मामा के घर की गर्मी की छुट्टी के दिन
भूरी मौसी बड़ी चिबब्ली,न रहे तो पूरा मोहल्ला सुनसान कर जाती,,
कभी हम बच्चों में बच्ची बन जाती और बड़ों की दादी, नानी
चुस्की वाला नुक्कड़ पर आता,और हम बच्चों की टोली
मीना,चुन्नी,पप्पी,टुन्नी,अज्जू,गुड्डी,,,सराफा की बच्चों की टोली,
मौसी का पल्ला पकड़कर ,साईं की चुस्की को पटा लेती
टूटी हुई एक बग्गी ,चौक में खेलते खूब हम बच्चे सवारी कर तांगा तांगा,और रोटा पानी
बड़ी मौसी के घर से मामा घर 100 चक्कर लगते
कभी यंहा कभी वँहा नाश्ता सुत ते,,,
ऐसे ये नाना नानी के घर ,गर्मी की छुट्टी बितानी
आरही है सुनहरी यादें,आंखों में मामा घर की कहानी,,
आम की पाल,,चख चख कर ,खट्टा हो तो आम के पापड़
बना डालती नानी,और मीठे मीठे ,ख़िलादेती हम सब बच्चों को देती प्यारी 2 नानी
ऐसी ही एक कार्बन कॉपी नानी की बेटी,मेरी माँ है जो करती हूबहू नानी की कॉपी
वैसी ही दिखती,वैसी ही लाड़ लड़ावन, वैसी ही मीठी धीरी बोली,,,प्यारी प्यारी माँ नानी को चुम्मी 🥰🥰प्रभा जैन इंदौर,,,नानी मामा घर की मीठी मीठी यादें🙏🏻🥭🌴🤝🎊🍡
हमें तो याद रही है हमेशा से नानी के घर की गर्मी की छुट्टियाँ
नानी का धीरेसे, हौलेसे, प्यारसे होंठो पर हाथ रख आश्चर्यसे बोल लाड़ करना आमों की पाल से ,छांटकर चोल चख कर मीठा आम देना बड़े मामा का चाट कचोरी पोहे हाथों से
बना कर,अखबार की प्लेट में प्यारसे परोस खिलाना बाज़ारों में दौड़ दौड़,अच्छे से अच्छा फल लाकर भर पेट खिलाना
मन मामा का धीरेसे आना,और फुसफुसाहट भरे अंदाज़ में बातें करना और सबसे छोटे मामा का ,छोटा होते हुए भी नाना
बन सब का ख्याल रखना याद आते है वो खंडवा के मामा के घर की गर्मी की छुट्टी के दिन भूरी मौसी बड़ी चिबब्ली,न रहे
तो पूरा मोहल्ला सुनसान कर जाती,, कभी हम बच्चों में बच्ची बन जाती और बड़ों की दादी, नानी चुस्की वाला नुक्कड़
पर आता,और हम बच्चों की टोली मीना,चुन्नी,पप्पी,टुन्नी,अज्जू,गुड्डी,,,सराफा की बच्चों की टोली, मौसी का पल्ला
पकड़कर ,साईं की चुस्की को पटा लेती टूटी हुई एक बग्गी ,चौक में खेलते खूब हम बच्चे सवारी कर तांगा तांगा,और
रोटा पानी बड़ी मौसी के घर से मामा घर 100 चक्कर लगते कभी यंहा कभी वँहा नाश्ता सुत ते,,, ऐसे ये नाना नानी के
घर ,गर्मी की छुट्टी बितानी आरही है सुनहरी यादें,आंखों में मामा घर की कहानी,, आम की पाल,,चख चख कर ,खट्टा हो
तो आम के पापड़ बना डालती नानी,और मीठे मीठे ,ख़िलादेती हम सब बच्चों को देती प्यारी 2 नानी ऐसी ही एक कार्बन
कॉपी नानी की बेटी,मेरी माँ है जो करती हूबहू नानी की कॉपी वैसी ही दिखती,वैसी ही लाड़ लड़ावन, वैसी ही मीठी धीरी
बोली,,,प्यारी प्यारी माँ नानी को चुम्मी
🥰🥰प्रभा जैन इंदौर,,,नानी मामा घर की मीठी मीठी यादें🙏🏻🥭🌴🤝🎊🍡
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