*लघुकथा*
*शान*
"सुनो सीमा, आज होटल जाने के लिए समय पर तैयार हो जाना, बच्चों से भी कह देना और हाँ, माँ को अच्छे से तैयार कर लेना। आज की पार्टी में बड़े -बड़े लोग आने वाले हैं" - राजेश ने अपनी पत्नी से कहा।
"हाँ-हाँ, आप चिंता मत करें सब हो जाएगा।" - सीमा बोली
शाम को सीमा अपनी सास के पास गई और बोली - "मम्मी जी हम सभी आज होटल चलेंगे। आपके बेटे ने आपके लिए एक पार्टी रखी है, अच्छे से तैयार हो जाइए। ये लीजिये साड़ी , आपका बेटा लाया है इसे पहन लीजिये।"
रमा देवी राजेश की माँ को समझ में नहीं आ रहा था कि जो बेटा-बहू उनसे कभी सीधे मुँह बात तक नहीं करते, साथ में खाना नहीं खाते , आज होटल क्यों ले जा रहे हैं?
फिर उन्हें लगा कि हो सकता है बेटे को यह एहसास हो गया हो कि उसका व्यवहार माँ के साथ अच्छा नहीं।
तैयार होकर सब समय पर होटल पहुँचे। माँ का हाथ पकड़ कर राजेश ने जैसे ही होटल के हॉल में प्रवेश किया, सभी ने तालियों से स्वागत किया। कैमरे के फ़्लैश चमकने लगे। बेटे-बहू माँ के साथ फ़ोटो खिंचाने लगे।
पार्टी में आया हुआ हर व्यक्ति राजेश और सीमा की तारीफ़ कर रहा था कि आजकल जब बच्चे माँ-बाप को नहीं पूछते ऐसे समय में माँ का पूरा परिवार इतनी देखभाल और ख़याल रखता है। मातृदिवस पर अपनी माँ के लिए इतनी बड़ी और शानदार पार्टी का आयोजन किया।
यह सब देख माँ अपने आँसू छुपा मुस्कुरा रही थी और सोच रही थी कि ओह तो ये सब तमाशा मातृदिवस के नाम पर शान दिखाने के लिए किया है।
*रश्मि सक्सेना*
इंदौर
Saturday, May 9, 2020
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