ग़जल
*ऐ ख़ुदा हर तरफ मौत- खाना हुआ*
*आफ़तों का कहां कब ठिकाना हुआ*
*आज फिर जां गई एक इंसान की*
*सिलसिला-ए -कयामत पुराना हुआ*
*वार पर वार कर ,खत्म हो जाय ना*
*ये सहनशीलता आज़माना हुआ*
*चांद से भेज दे इक मसीहा हमें*
*बंद इंसान मिलना- मिलाना हुआ*
*हो गया ये शहर आज वीरान सा*
*भीड़ देखें हुए इक ज़माना हुआ*
*लोग पथरा गए राह तकते हुए*
*सांवरे का जमीं पर न आना हुआ*
*जानती है 'सुमन' भौर फिर आयगी*
*कब निशा का सदा शामियाना हुआ*
👉 सीमा शिवहरे सुमन
*ऐ ख़ुदा हर तरफ मौत- खाना हुआ*
*आफ़तों का कहां कब ठिकाना हुआ*
*आज फिर जां गई एक इंसान की*
*सिलसिला-ए -कयामत पुराना हुआ*
*वार पर वार कर ,खत्म हो जाय ना*
*ये सहनशीलता आज़माना हुआ*
*चांद से भेज दे इक मसीहा हमें*
*बंद इंसान मिलना- मिलाना हुआ*
*हो गया ये शहर आज वीरान सा*
*भीड़ देखें हुए इक ज़माना हुआ*
*लोग पथरा गए राह तकते हुए*
*सांवरे का जमीं पर न आना हुआ*
*जानती है 'सुमन' भौर फिर आयगी*
*कब निशा का सदा शामियाना हुआ*
👉 सीमा शिवहरे सुमन

Thanks Sunita didi
ReplyDeleteSeema shivhare suman
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