"ॐ"
( फ़ाग गीत)
रुत मनभावन फागुन की आई।
रास रचाये कृष्ण-कन्हाई।
रँगीले रंगों की बहार आई।
टेसू के फूलों से डार-डार मुस्काई।
रुत मनभावन.....।ब्रज में मिले राधा को कृष्ण कन्हाई।
रंगों की छटा चहुँ ओर छाई।
मंद-मंद पवन मुस्काई।
राधा संग सखियॉँ हरषाई।
रुत मनभावन .....।
बंसी की धुन पर राधा इतराई।
छम-छम की घुन ब्रज में समाई।
सखियों संग राधा मुस्काई।
फिर ब्रज में होली ने धूम मचाई।
रुत मनभावन....।
रंगभरा आलम
देख,हर मन मे प्रीत समाई।
ढोल-मंजीरा बाजत कृष्ण की टोली आई।
गीत फ़ाग के गाते,प्रेम धुन पर रास रचाते कृष्ण
कन्हाई।
रुत मनभावन फागुन की आई।
वंदना पुणतांबेकर
( फ़ाग गीत)
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| वंदना पुणताँबेकर |
रास रचाये कृष्ण-कन्हाई।
रँगीले रंगों की बहार आई।
टेसू के फूलों से डार-डार मुस्काई।
रुत मनभावन.....।ब्रज में मिले राधा को कृष्ण कन्हाई।
रंगों की छटा चहुँ ओर छाई।
मंद-मंद पवन मुस्काई।
राधा संग सखियॉँ हरषाई।
रुत मनभावन .....।
बंसी की धुन पर राधा इतराई।
छम-छम की घुन ब्रज में समाई।
सखियों संग राधा मुस्काई।
फिर ब्रज में होली ने धूम मचाई।
रुत मनभावन....।
रंगभरा आलम
देख,हर मन मे प्रीत समाई।
ढोल-मंजीरा बाजत कृष्ण की टोली आई।
गीत फ़ाग के गाते,प्रेम धुन पर रास रचाते कृष्ण
कन्हाई।
रुत मनभावन फागुन की आई।
वंदना पुणतांबेकर


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