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| श्रीमती वंदना अर्गल |
गोरी का मन हरषाया,प्रणय निवेदन करने को हर नौजवान का मन गुदगुदाया ।
रंग बिरंगी घाघरा चोली गौरीअब तो पिया संग खेलेगी होली,
महुआ की डाली है महकी,टेसु पर आया शबाव ,अमराई भी बौराई,
कोयल काली सुना रही,मधुर प्रीत का गान।
टीका ,झुमका,बाजुबंध,तगडी़ खाकर पान का बीडा़,
लाल,गुलाल से लाल हुए है गाल,नैना हुए मतवारे,ताडी़ चढा़
मदमसत है सारे,
गौरी भी शरमाई सी, सकुचाई सी ,मंद मंद मुस्रकाये।
संग चलूगीं,प्रीत करूगीं पर करले मुझसे ये वादा,साक्षर होने का अब तो मेरा है इरादा,

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