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| स्वाति सिंग |
फिर भी बराबर प्रश्न होते रहे, आप पीते नहीं तो आपको मदिरा पर लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिलती है?
तब श्री हरिवंश राय बच्चन कहते हैं प्रश्न दो भोला था, पर था ईमानदार। एक दिन ध्यान आया कि कायस्थों के कुल में जन्मा हूँ, जो पीने के लिए प्रसिद्ध हैं, या थे। चन्द बरदाई के रासों का छप्पय याद भी आया। सोचने लगा, क्या पूर्वजों का किया हुआ मधुपान मुझपर कोई संस्कार ना छोड़ गया होगा! भोले-भाले लोगों को बहलाने के लिए एक रुबाई लिखी

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