कामायनी जयशंकर प्रसाद की अंतिम कृति है |यह 15 सर्ग का महाकावय है |
जयशंकर प्रसाद जी ने कहा -नारी तुम केवल शरदधा हो |वर्तमान युग की बात करे तो नारी ने जो साहस का परिचय दिया है वह सराहनीय है |संकल्प कर लेने वाली हर नारी पुरुष पर भारी है |
विग्यापनों में नारी कामायनी जयशंकर प्रसाद की अंतिम कृति है |यह 15 सर्ग का महाकावय है |
जयशंकर प्रसाद जी ने कहा -नारी तुम केवल श्रद्धा हो
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| आनीला जगत |
विग्यापनों में नारी कामायनी जयशंकर प्रसाद की अंतिम कृति है |यह 15 सर्ग का महाकावय है |
जयशंकर प्रसाद जी ने कहा -नारी तुम केवल श्रद्धा हो

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