Tuesday, March 19, 2019

साहित्यिक प्रतियोगिता5

कामायनी जयशंकर प्रसाद की अंतिम कृति है |यह 15 सर्ग का महाकावय है |
आनीला जगत
जयशंकर प्रसाद जी ने कहा -नारी  तुम केवल शरदधा हो |वर्तमान युग की बात करे तो नारी ने जो साहस का परिचय दिया है वह सराहनीय है |संकल्प  कर लेने वाली हर नारी पुरुष पर भारी है |
विग्यापनों में नारी कामायनी जयशंकर प्रसाद की अंतिम कृति है |यह 15 सर्ग का महाकावय है |
जयशंकर प्रसाद जी ने कहा -नारी  तुम केवल श्रद्धा हो

No comments:

Post a Comment

Featured Post

हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार

एक सच्चा रिश्ता एक अच्छी किताब की तराहा होता है,  कितनी भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते, रास्ते बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए, लेकिन स...