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| Swati sing |
विदाई ली रही रंगो की होली
समेटे जा रही हंसी और ठिठोली
ऐ होली तू छोड़ जा
निशा रंगो के
दे जा सौगात रंगों की
आये जब बरस बाद तू
तो मन वैसा ही हो बजरंगी
तरंग मन में हर रंग मन में
भर जाए नवरंग जीवन में
की धरती हरी हो
हरी हो भरी हो
और नीला आसमान
केसरिया साधु मन हो
पीले खेत और
रंग बिरंग बिरंगे फूलों का हो बागवान
हर गाल गुलाबी
और मन में हो कामयाबी
बस ऐसा सजा हुआ मन
में हो अगला होली का मिलन


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