Monday, March 18, 2019

क्यो रूठे हो तुम।मुझसे

*
बनी* रेबिट तुम प्यारे से
क्यों रूठे रूठे हो मुझसे
नहीं हूँ तुमसे ज्यादा दूर
तुम मेरे नयनों के नूर

देखो  गोलू हाथी है
गोल सी मच्छर दानी है
चांद सितारे लटक रहे
तितली के हैं रंग  बिखरे

ग़ुब्बारों की है दुनिया
नरम गरम गादी तकिया
मेरा बचपन लौट आया
संग खिलौने ले आया

लकड़ी की काठी का घोडा
मन  मेरा शिशु पन में दौड़ा
इस बाल पने में रहने दो
भगवन बचपन को जीने दो

तारों के संग हँसने दो
चंदा सा चम चम कर दो
नरम नरम कंबल ओढ़ा के
निंदिया रानी आने दो

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रचयिता:-
कुसुम सोगानी - लेखिका
साहित्यकार

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