आई रंगपंचमी
आई रंगपंचमी रंग लाई रंगपंचमी ।
खुशियों का खजाना भर लाई पंचमी।।
होली पर जो भूल गये रंग खेलन को ।
हाथ पिचकारी दिला लाई रंगपंचमी ।।
रूठ गए जो अबीर गुलाल के ढेर।
रंगों की महक भर लाई रंगपंचमी ।।
नफरत के जहाँ जहाँ कांटे उग रहे।
प्रेम के फूल खिला लाई रंगपंचमी ।।
होली पर जो मित्र सूखे बच गए हैं ।
उन्हें रंग में डुबा लाई रंगपंचमी ।।
रंग में न भीगे तो कैसी खेली होली।
भर पिचकारी रंग उड़ाए रंगपंचमी ।।
हुआ धमाल तो खूब उड़ेगा गुलाल।
होली की धूम मचा लाई रंगपंचमी ।।
नगाड़े बजे निकली युवाओं की टोली
नाचें- गाए बरसाने की आई रंगपंचमी ।।
आशा जाकड़
9754969496

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