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| आराधना विसावाड़ीया |
पान ,ठंडा शरबत मन को भाता है, पर्व भगोरिया आता है |
ढोल, मांदल, बंसी, घुंघरु, भील बालाएं, चांदी की पट्टिकाएं, तागली,बाजूबंद चूडियाँ, गोदना
गुदवाती आदिवासी बालाएं |
गालों पर गुलाल मल प्रणय निवेदन कर युवा मन इठलाता
है, बिना कुंडली जोड़ी बन जाती है, गाओ सखी भगोरिया आता है|
द्वारा -आराधना विसावाडिया
इंदौर


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