होली की रचनाओं के कुछ अंश
भ्रष्ट नीतियां भ्रष्ट आचरण आज जला दो होली में
मिटें द्वेष नफरत के बाने आज जला दो होली में
कमर तोड़ दी आग लगा दी जिसने गरीब की खोली में
महंगाई की टांगें खींचो और जला दो होली में
2-
होली में दिल का हाल बेहाल हो चला है
कि मारो रंग पिचकारी दिलअधीर हो चला है
नफरत की होली जल गई दिल कबीर हो चला है
मारो रंग पिचकारी दिल फकीर हो चला है
अवनि
भ्रष्ट नीतियां भ्रष्ट आचरण आज जला दो होली में
मिटें द्वेष नफरत के बाने आज जला दो होली में
कमर तोड़ दी आग लगा दी जिसने गरीब की खोली में
महंगाई की टांगें खींचो और जला दो होली में
2-
होली में दिल का हाल बेहाल हो चला है
कि मारो रंग पिचकारी दिलअधीर हो चला है
नफरत की होली जल गई दिल कबीर हो चला है
मारो रंग पिचकारी दिल फकीर हो चला है
अवनि

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