फाल्गुन मे मस्त हो
भीलो के जीवन को छूती
माही मे बहते
कलख के संग
भगोरिया ले आती
भील बालाएँ
चाँदी की पट्टिकाएँ
तागली बाजुबंद चूडियाँ
पहनेआती
ढोलक की थाप
थाली की झंकार
बाहली की मधुर धुन
खनकते घुँघर
मधुर स्वर लहरिया
इन्ही दिनो आम आते
रसभरा सुगंधित महुआ
फसल पकी तो पर्व मनाते
भीलजन नाचते गाते
भी लनीयो को रिझाते
मन भा जाये तो
वधु बनाकर ले जाते
भोजगडा की रकम चुकाने
लडके का बाप जात नोतता
संगे सम्बन्धी साथी जुटते
सवाया डाल आते
मन्जुरी करते मामा मामी
चारुमित्रा नागर
भीलो के जीवन को छूती
माही मे बहते
कलख के संग
भगोरिया ले आती
भील बालाएँ
चाँदी की पट्टिकाएँ
तागली बाजुबंद चूडियाँ
पहनेआती
ढोलक की थाप
थाली की झंकार
बाहली की मधुर धुन
खनकते घुँघर
मधुर स्वर लहरिया
इन्ही दिनो आम आते
रसभरा सुगंधित महुआ
फसल पकी तो पर्व मनाते
भीलजन नाचते गाते
भी लनीयो को रिझाते
मन भा जाये तो
वधु बनाकर ले जाते
भोजगडा की रकम चुकाने
लडके का बाप जात नोतता
संगे सम्बन्धी साथी जुटते
सवाया डाल आते
मन्जुरी करते मामा मामी
चारुमित्रा नागर


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