Wednesday, March 27, 2019

श्रीमती की डायटिंग

नम्रता सरन सोन
*हास्य कविता*

*श्रीमती की डायटिंग*

फ़ैसला कर ही लिया पत्नी ने
पतिदेव को दिखा  देंगे
हम भी धुन के पक्के हैं...
साबित करके दिखा देंगे....
बोल दिया उनको
अब एकसूत्रीय कार्यक्रम
वज़न घटाना है....
दिनभर पानी पीना है
और सिर्फ़ हवा खाना है....
पतिदेव दहशत मे हैं
अब कौन पहाड़ टूटेगा...
न जाने किन शर्तों पर
श्रीमती का अनशन टूटेगा....
अगले ही दिन
गृहसंसद मे अगले दिन
पारित हुआ आदेश
न हम कुछ खाऐंगे न ही कुछ बनाएंगे....
इतना कॉपरेट तो करना होगा
तब ही छरहरी बीवी पाओगे....
श्रीमान समझ गए
अब रोज़ ऐसे बम फ़ूटेंगे
कभी प्लेट  कभी कटोरे
कभी गिलास टूटेंगे....
भूखी बिल्ली हुई ख़तरनाक
कभी भी कर देगी चढ़ाई...
डायटिंग पर है देवीजी
बात बात पर करे लड़ाई....
क्या करें कुछ समझ न आए
कैसे अनशन खत्म करवाएं
दो दिन से हम भूखे हैं...
कल तक कहीं मर न जाएं...
जुटा के हिम्मत बोले पतिदेवा
देखो प्रिये तुम जैसी हो अच्छी हो
थोड़ी हेल्दी हो पर मन की सच्ची हो...
देखो चेहरा कितना उतर गया है
वो हँसता मुख किधर गया है....
चलो रबड़ी लाया हूँ जल्दी से खा लो
दुबले पतले होने की बेकार ज़िद मत पालो....
रबड़ी देख श्रीमती जी का रंग कुछ बदला
वो शर्माईं नज़रें घूमाई रबडी का पत्ता पकड़ा....
गटक गई एक साँस मे बोली दो दिन से भूखी हूँ..
हवा पानी खा खाकर देखो कितनी सूखी हूँ...
देखो जी अब कभी न मोटा कहना..
वरना मेरे साथ भूखा तुम्हें भी पड़ेगा रहना...
श्रीमान जी सोच रहे मन ही मन
मेरी तौबा जो अब ऐसी ग़लती कर जाऊंगा..
बीवी झटके या न झटके मैं भूखा मर जाऊंगा.....

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