Thursday, July 23, 2020

अमृत रस

अमृत रस 
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खुद को खुद ही बचा लो भाई

 अभी बाहर जाना टालो भाई मझधार में पड़ी जीवन नैया 

पार इसे खुद ही लगा लो भाई चार दिन की यह बात नहीं है 

काटना है अभी तो सालों भाई गगन मंडल से

 अमृत रस बरसे गर समझ सको तो पा लो 

भाई मन संग इन्द्रियां विषय रस पिए सत्संग

 से मन को सभांलो भाई साथ न जाएगी 

लौकिक माया राम- रतन--धन कमा लो 

भाई तन की सुंदरता मत देख 'परिंदा' 

अन्तर मन को भी सजा लो भाई

* राम शर्मा परिंदा मनावर जिला धार मप्र मो 7869196304 24/07/2020

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