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आज तो घर घर मे बडी री चाय की या आग रे
सुरेश ने समझावे ने सविता रिसाय रे
छोरा छोरी चाय पीले फेरी मुडो धोवोरे ।
बिस्तर पे चाय पीले बीना दातन करेरे
आज तो घर घर मे बडी र ई चाय की या आग रे।
देरानी बनय लेतो जेठानी घुराय रे ।
बच्चा बुढा जवान ने चाय घडी भावेरे ।
चाय पीले जान आवे मानो अमृत पीलीयो रे ।
बायरे बैठा सासु सुसर चाय दन भर मागे हैं ।
आज तो घर घर मे बडी र ई चाय की या आग रे ।
चाय बीना सुसती आवे आँख नी खुले रे ।
थोडी पीनी चाय ज्यादा करे नुकसान रे ।
आज तो घर घर मे बडी र ई चाय की या आग रे ।
चार जना हम घर में पाँचवो आवे पावडो
चाय को नी पूछो तो मुडो चढी जावेरे ।
आज तो घर घर मे बडी र ई चाय की या आग रे ।
मोदी दादा ने चाय पीलय ने ।कौनसो पद पयलियो ।
अपनो काम करवानो हो तो चाय पय दिजो ।
चाय को एसो चमत्कार है सब काम हुई जावेगो ।
सुनता हो सुनजो भैया मजे की या बात रे
दोई जना जडी लडे पडे तो चाय सा उबराय वेरे ।
*चारूमित्रा नागर
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