Tuesday, July 21, 2020

चाय की आग

चाय की आग
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आज तो घर घर मे बडी री  चाय की या आग रे

सुरेश ने समझावे  ने सविता  रिसाय  रे

छोरा छोरी  चाय  पीले  फेरी  मुडो  धोवोरे ।
बिस्तर पे चाय पीले बीना दातन करेरे 

आज तो घर घर मे बडी र  ई चाय की या आग रे।

देरानी  बनय लेतो  जेठानी  घुराय रे ।
बच्चा बुढा जवान ने चाय  घडी  भावेरे ।
चाय पीले जान आवे  मानो अमृत  पीलीयो रे ।

बायरे  बैठा  सासु सुसर  चाय दन भर मागे  हैं ।
आज तो घर घर मे बडी र ई चाय की या आग रे  ।

चाय बीना सुसती आवे  आँख नी खुले रे ।
थोडी  पीनी  चाय  ज्यादा करे नुकसान  रे ।
आज तो घर घर मे बडी र ई चाय की या आग रे ।

चार जना हम घर में  पाँचवो  आवे पावडो  
चाय को नी पूछो तो मुडो चढी जावेरे ।
आज तो घर घर मे बडी र ई  चाय की या आग रे ।

मोदी दादा ने चाय पीलय ने ।कौनसो पद पयलियो ।
अपनो काम करवानो हो तो चाय पय दिजो ।
चाय को एसो चमत्कार है  सब काम हुई जावेगो ।

सुनता हो सुनजो भैया  मजे की या बात रे 
दोई जना जडी लडे पडे तो चाय सा उबराय  वेरे ।

*चारूमित्रा नागर

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