*समाधान*
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*अभी कुछ दिनों पहले ही जोशी जी स्थानांतरित होकर आए थे। जोशी जी पुलिस अधिकारी होने और मै शासकीय अधिवक्ता होने से वे मुझसे संपर्क में आने लगे इस बहाने उनके और मेरे बीच दोस्ताना संबंध बन गये थे। जोशी जी का एक दिन दोपहर को मोबाइल पर फोन आया कहने लगे वकील साहब मै आपसे मिलना चाहता हूं । मुझे निजी काम से मुलाकात का वक्त चाहिए। जोशीजी के लहजे मे चिंता आक्रोश के मिश्रीत भाव झलक रहे थे । मैंने कहा जोशी जी चिंता न करे आपके लिये मैं अपने शाम सात बजे का समय निश्चित करता हूं और अपने बाकी अपाइंटमेंट कैंसिल करता हूं। आप निश्चिंत होकर आइए साथ साथ काफी पिएंगे। हमारी मुलाकात का समय निश्चित हुआ। मैंने उस दिन के अपने बाकी अपाइंटमेंट कैंसिल कर दिये।*
*शाम सात बजे मै अपने आफिस में जोशी जी का इंतजार कर रहा था। मेरा निवास और आफिस एक ही स्थान पर है । उसी दौरान जोशीजी अपनी पत्नी श्रीमती जोशी और उनकी बिटिया रिया नातिन श्रुती के साथ मेरे आफिस में आ गये। जैसे ही मैनें श्रीमती जोशी को देखा तो मै अपनी श्रीमती को आवाज देने लगा , तो जोशी जी ने बड़े ही भारी मन से मना करते हुए कहा आज हम मेहमान के तौर पर नही आएं हैं। हम अपनी समस्या का समाधान चाहते हैं।*
*मै समझ गया जोशी जी और उनके परिवार की समस्या गंभीर है और उनका सारा ध्यान समस्या के समाधान की तलाश चाहता है। मैंने कहा ठीक है । आप कहिए मै आपकी क्या मदद कर सकता हूं।*
*जोशीजी ने कहा हम मूलतः कानपुर उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं। ये मेरी बेटी रिया है । इसकी शादी आज से छ: साल पहले हमने कानपुर उत्तरप्रदेश मे की थी दामाद संजय पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं। रिया को जब बेटी श्रुति हुई तब से ही रिया के साथ ससुराल वालों का व्यवहार बदल गया। रिया और श्रुति को मायके से ले जाने से भी दामाद संजय और ससुराल वालों ने इंकार कर दिया। बड़े बुजुर्गो की समझाइश पर दामाद संजय , रिया को लेकर तो गये लेकिन इसके बाद दामाद संजय शराब पीकर घर आने लगे। रिया बिटिया के साथ मारपीट करना शुरू कर दिया। आक्रोश इस बात का कि बेटी पैदा की है , इसकी शादी का टीका खर्चा कहा से दूंगा। रिया से दामाद संजय कहते थे , अपने बाप से कह दो श्रुति के नाम दस लाख की एफडी कर दे। रिया कुछ दिन सहन करती रही एक दिन रिया ने विरोध किया और कहा बेटी हमने पैदा की ही उसकी एफडी आप को करना चाहिए । उस दिन दामाद ने शराब पीकर हद्द कर दी बेटी के साथ मारपीट की और श्रुति सहित रात नौ बजे घर से निकाल दिया। रिया अपनी अबोध बेटी को लेकर जैसे तैसे मेरे छोटे भाई के घर पहुंची । मुझे खबर दी गई मै जबलपुर से कानपुर गया और अपनी पिता की भूमिका की मजबूरी वश पुलिस को रिपोर्ट न करते हुए रिया बिटिया और नातिन श्रुति को अपने साथ ले आया । तब से रिया बिटिया और नातिन श्रुति हमारे साथ ही रह रही है। श्रुति अब पांच साल की होने को आई हैं। इस बीच दामाद ने कोई फिक्र दोनों की नही की। कोई बात नहीं कोई आना जाना नहीं। कुछ दिनों पहले पता चला कि दामाद संजय ने कानपुर कोर्ट के जरिए रिया से एक तरफा तलाक ले लिया है। मैंने अपने छोटे भाई को हकीकत पता करने का कहा। छोटे भाई ने कोर्ट से तलाक की डिक्री का प्रमाणित दस्तावेज डाक से भेजा जो आज ही दोपहर मे हमें मिला है। तब से ही मै अपने दामाद को सबक सिखाने के मूड मे हूंं। इसलिए ही हम लोग आप से मिलने आएं हैं।*
*जोशी साहब आप खुलकर बताए आप क्या सहायता चाहते है मुझसे। जोशी जी बोले वकील साहब हम इस एक्सपार्टी तलाक आदेश जो दामाद ने लिया है उसे चुनौती देना चाहते हैं। हम उस दामाद को भी आसानी से खुश रहने देना नहीं चाहते हैं जिसने हमारी बेटी और नातिन को दुख दिया है । मैंने कहां ठीक है। जोशी जी क्या मै रिया बिटिया से कुछ सवाल पूछ सकता हूं। अरे वकील साहब कैसी बात करते हैं आप जो जानना चाहते हैं वो बेहिचक पुछिए । मैंने कहा जोशी जी किसी भी मामले पर आगे बढ़ने से पहले मैं उस मामले के हर पहलू पर विचार कर लेना चाहता हूं इसलिए मैं कुछ जरूरी जानकारी हासिल करना जरुरी समझता हूं। जोशी जी बोले वकील साहब मै अभी छ: माह से आपके संपर्क में हूं तब से देख रहा हूं , शासकीय अधिवक्ता की भूमिका में आप मामलो को गंभीरता से हेंडल करते हैं । मैंने अपनी सेवा लाईफ में बहुत कम वकीलों को देखा है जो सरकारी काम को गंभीरता से लेते हैं । वकील साहब आपकी केसवर्क पर सतत् नजर ने ही मुझे आपसे अपने निजी मामले पर समाधान के लिए संपर्क करने को मजबूर किया हैं। जोशी जी की इस बात पर मुझे मुस्कुराने के अलावा कुछ नहीं सूझा। मैंने रिया बिटिया से जानकारी हासिल करने की नियत से सवाल करना शुरू किया ।*
*रिया बिटिया आपकी उम्र कितनी है?*
*जी 27 साल।*
*क्या तुम इस फैसले को चुनौती देने का कारण बता सकती हो?*
*जी, मुझे , संजय से जो प्रताड़ना मिली है। उसका जवाब देना हैं इतनी आसानी से उसे रिश्ते से मुक्त नही करना चाहती हूं। मै एकतरफा फैसले को चुनौती देना चाहती हूं।*
*क्या तुम ये जानती हो इस मामले में अदालत में न्याय मिलने में कितना वक्त लग सकता है?*
*नहीं।*
*तुम्हें न्यायालय में अपने पति की तलाक की फरियाद को इंकार करना होगा याने तलाक का विरोध करना होगा। इसका मतलब क्या तुम अपने पति के साथ आगे जीवन बिताने की इच्छा रखती हो?*
*नही मै अपने पति के साथ एक पल भी नही रहना चाहती।*
*जब तुम अपने पति के साथ नही रहना चाहती तो फिर मात्र स्वयं उलझने के लिए मामले को क्यो खोलना चाहती हो जबकि इसका कोई लाभ नही है ?*
*मै समझी नहीं।*
*मै जोशी जी से मुखातिब हुआ। जोशी जी , क्या आप बिटिया को दामाद के साथ जीवन बीताते हुए देखना चाहते हैं ?*
*नही वकील साहब।*
*तो क्या बिटिया का फिर किसी अन्य से विवाह करना चाहते हैं?*
*हां।*
*मैंनें कहा यदि अदालत मे हम उलझते हैं तो कम से कम 15 साल सर्वोच्च न्यायालय से फैसला आने तक हम उलझे रह सकते हैं। क्योकि दोनों ओर से यदि हार नहीं मानी जाती है तो तय मानिए चुनौती सुप्रीमकोर्ट तक दी जाएगी। जरुरी नही कि चुनौती कब कौन देगा।*
*एक साधारण सी बात गौर करने लायक है कि आज 27 साल की बिटिया केस लड़ते लड़ते 15 साल बाद 42 साल की हो जाएगी और निर्णय भी अनिश्चित हैं ,कुछ भी आ सकता है। तब बिटिया की उम्र शादी लायक नही रह पाऐगी। क्या बिटिया का जीवन सुखी बिताने का इरादा हैं या उलझा हुआ बिताने का इरादा हैं ?*
*वकील साहब जीवन सुलझा रहे वो ही अच्छा है।*
*जोशी जी जब इंसान सुवर से भिड़ने की सोचे तो उसे गंदगी में उतरना ही होता है।*
*और एक बात आप का रिटायरमेंट कब हो रहा है। वकील साहब दो साल बचे हैं। आप रिटायर होने के बाद कहा बसना चाहते हैं। वकील साहब मैंने इंदौर मे मकान ले लिया है। अब इंदौर में सेटल हो जाऊंगा। जोशी जी सर्विस के बाद आफ एक दम फ्री हो जाएंगे। तब बिटिया के प्रकरण पर आपका ज्यादा फोकस रहेगा। उम्र के ढलान पर इंदौर से कानपुर मुकदमे के दौरान दौड़ लगानी होगी।याने प्रकरण के अंतिम निराकरण तक आप भी तनाव में रहेंगे। ऐसे में आप बीपी शुगर आदी बिमारियों को आमंत्रित करने जा रहे हैं। मेरे विचार से हमे यदि बिटिया को भेजना नही है तो इस एक तरफा फैसले को मान लेने से बिटिया की वैवाहिक जीवन के तनाव से मुक्ति मिली हैं यह मान लो । हम बिटिया के लिए योग्य लड़का ढ़ूढ कर आज रिश्ता जोड़ते हैं तो सर्वोत्तम रहेगा। मगर 15 साल की चुनौती स्वीकार कर उलझे रहते हैं तो योग्य लड़का बिटिया के लिए मिल पाना कठीन होगा। वैसे इस मामले को उसी कानपुर की अदालत में चुनौती देना होगा। इसके लिए वही का वकील भी करना होगा। अंततः मेरे विचार से हमें इस फैसले को चुनौती नही देना चाहिए इसमें हमारा फायदा हैं। अब तय आप को करना है उचित क्या है?*
*जोशीजी और भाभीजी के साथ साथ बिटिया रिया की आंखो ही आंखो में जैसे बात हुई हो। मै सभी की आंखों में राहत देख रहा हूं। जोशी जी ने कहा वकील साहब ,आपने हमारे सारे आक्रोश को ठंडा कर दिया । जब आपके सामने बैठे तो वास्तविकता के धरातल पर कदम रखते ही सारा गुस्सा छू हो गया हैं। जोशी जी बोले पिछले एक सप्ताह से जब से तलाक का समाचार मिला है तब से घर पर तनाव का माहौल बन गया था। घर लौटता था तो हम सभी आपस में जरुरत जितना ही बात कर पाते थे। लेकिन आज और अभी से लगता है बिती ताई बिसार दे आगे की सुधि ले। वकील साहब आज सकुन की नींद आएंगी।*
*जोशी जी ईश्वर की व्यवस्थाओं को समझना हमारे बस में नही है मगर कुछ तो अच्छा होगा ही, ईश्वर किसी का बुरा नही करता । ये तो हम अल्पबुद्धी में ईश्वर को कोसते रहते हैं। निश्चिंत हो कर जोशी परिवार अपने घर लौट गया।*
*करीब एक माह बाद जोशी जी ने फिर से फोन करके मिलने का समय मांगा। आज उनकी आवाज में आत्मविश्वास की झलक मिल रही थी। फिर भी मैंने कहा जोशी जी सब ठीक तो हैं ना , जोशी जी ने जोश में भरकर कहां वकील साहब दोहरी खुशियां मिलने जा रही हैं। आपसे मिलकर खुशियां बांटूंगा । मुझे सकुन मिला चलो ईश्वर ने कुछ अच्छा ही किया होगा।*
*शाम को जोशी जी ,भाभीजी के साथ मेरे घर पर पधारे। वकील साहब आज हम भाभीजी के हाथ की चाय भी पिएंगे और आपको मिठाई भी खिलाएंगे। मैंने कहां अरे वाह क्या बात है। जोशी जी की दोगुनी खुशी को सुनने को दिल बेताब हुआ जा रहा था मगर श्रीमती को बुलाना भी जरूरी था। श्रीमती को बुलाया, भाभीजी और उनका परिचय होने के उपरांत मैंने जोशी जी से पुछा आप कोई खुशी शेयर करना चाहते थे। जोशी जी बोले वकील साहब हम आपके पास अपनी समस्या लाने के बजाय कही और चले गये होते तो शायद हमें आज रिया के लिए बेहतर रिश्ता नहीं मिलता। पिछले एक हफ्ते से हम लोग रिया के रिश्ते पर बात कर रहे थे । रिया के मामा ने रिश्ता तय कराया है। खास बात यह है कि लड़का जय तलाकशुदा जरुर है मगर अमेरिका में जाब करता है। उसकी बीबी उसके साथ अमेरिका रहना नही चाहती थी और इस वजह से ही उनके बीच तलाक हुआ है । खास बात यह है कि दोनों ने सहमती से तलाक लिया है और आने वाली दस तारिख को तलाक को पुरे चार माह हो रहे हैं। जय हमारी श्रूति को भी पिता का नाम देने को तैयार हैं। मैंने कहा ये बहुत अच्छी बात है। वकील साहब श्रुति अपनी मां के बगैर नही रह पाती है। कम से कम जय की उदारता से श्रुति की यह समस्या भी हल हो गई हैं। बताओं हमारे लिए दोहरी खुशियां है ना। मैन कहा चलो अच्छा ही हुआ।*
*मै विचार करने लगा जय के लिए श्रुति को अपने साथ ले जाना तो आसान है । मगर पिता का नाम देने में कानूनी अड़चन बाकी है। मैंने जोशी जी से कहा हमें श्रुति का दत्तकनामा जय के हित में लिखने में कानूनी अड़चन है। जोशी जी चिंतित हुए अब क्या होगा? मैंने कहा जोशी जी ईश्वर ही आपकी समस्याओं का समाधान दे रहा है । चिंता न करे , कुछ न कुछ जरुर होगा। खैर हमारी मुलाकात के बाद जोशी जी थोड़ा चिंता मे नजर आएं । मैंने कहा जोशी जी ईश्वर पर भरोसा रखो। जोशी जी कहने लगे वकील साहब आपकी बातों से हौसला लेकर जा रहा हूं। मगर एक बात कहूंगा श्रुति को लेकर उसके पिता संजय को कभी चिंता नही रही। इसलिए भी बाद में संजय , श्रुति पर वो कोई दावा नही करेगा मुझे पुरी उम्मीद है। आप कोई कानूनी रास्ता जरूर निकाले। मै मौन रहकर एक मुस्कराहट फैला दी। मन ही मन ईश्वर को याद करते हुए बुदबुदाया हे ईश्वर, श्रुति की समस्या का समाधान भी आपके ही पास है इस बच्ची की खुशियां लौटा दो।*
*कहते हैं ईश्वर में आस्था है तो उलझनों में भी रास्ता है। चार दिन बाद ही जोशी जी मुझसे मिलने कोर्ट आ गये। अरे जोशी जी आप आज तो कोई मामला आपकी गवाही का नही है फिर कैसे आना हुआ। जोशी जी बोले वकील साहब आपकी ईश्वर में बड़ी आस्था है आपके कहे वाक्य पर भरोसा करके घर चला गया था। मुझे इसका प्रमाण आज मिल गया। मैने पुछा क्यों ,क्या हुआ ? जोशी जी बोले श्रुति के जैविक पिता संजय लगातार शराब पीते रहने से उसका लीवर खराब होगया था और लंबे समय तक बिमार रहने के बाद कल रात उसकी मौत हो गई। मैनै कहा जोशी जी ये सब कुछ श्रुति बिटिया के भविष्य को लेकर ईश्वर का प्रसाद समझिएगा। वकील साहब अब हमें आगे क्या करना होगा। मैने कहा श्रुति के भाग्य नि पलटा खाया है। रिया , श्रुति की प्राकृतिक मां तो है ही और पिता के जीवित न रहने पर पिता के सारे दायित्व मां में निहित हो जाते हैं। अब श्रुति की मां रिया , जय से शादी से एक दिन पहले अपने होने वाले पति जय को श्रुति का दत्तकनामा लिखकर देने में सक्षम है और रिया ऐसा करके देगी। अगले ही दिन रिया और जय की शादी होने से श्रुति की मां का दायित्व और अधिकार फिर से हासिल कर लेगी।*
*रिया ने दत्तकनामा लिखा दुसरे दिन जय से विवाह किया और उसके बाद रिया अपनी बेटी श्रुति के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ चूकी हैं। दोनों अमेरिका में खुशहाल जीवन बिता रहे हैं।। जीवन में कुछ पड़ाव ऐसे भी आते हैं जहा न चाहते हुए भी कुछ समय रुकना ही होता है। मगर हर समस्या का सुखद समाधान ईश्वर के पास है यह मानकर हम समस्याओं का सामना करें। खुशियां हासिल होना ही है।*
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*एक नये कथानक पर मेरी ताजा कहानी-- राजकुमार अत्रे (राज) एडवोकेट खरगोन*
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