Monday, February 3, 2020

शीर्षक||||   प्रेम से  ।।।।।
फिर एक ठिठुरती हुई प्रातः बेला है
पत्तों और फूलों के मन हर्षित हैं क्योंकि
उन्हें ओस के मोती उपहार में मिले हैं
जोअन्य मौसम में नहीं मिल सकते।
बड़ा अच्छा लगता है उनका कोमल स्पर्श
हांलाकि ं वे जानते हैं कि सूरज निकलेगा
और ये मोती गायब हो जाएंगे
प्रतीक्षा रहेगी रात्रि के बाद सुबह की
जिसमें उन मोतियों से बतियाने का
आनंद भरपूर मिलेगा ं क्योंकि मोती
बड़ी अच्छी और प्यारी बातें करते हैं ।
कहते हैं कि यही जीवन दर्शन है
अभी हैं तो कुछ समय बाद नहीं
क्यो ना इन क्षणों को भरपूर जी लें
और क्षणिक जीवन का आनंद लें
सान्निध्य का बातों मुलाकातों का।
बाद में तो तुम भी मुरझा जाओगे
या सूख जाओगे तब हमारी बाते
बहुत याद आएंगी तुम्हें कयोंकि 
तुम पर भी अस्थाई होने का ठप्पा
हमारी तरह ही लगा है ।
यह बात सृष्टि के नियमों केअंतर्गत है
जिनको हमें मानना ही है
बस प्रार्थना यही करते हैं कि
जितना समय हमें मिला उतना
बढिया से बढिया बीत जाए।
दुनिया के लोगों को भी संदेश यही
देते हैं कि जब तक रहें प्रेम से रहें
और हर पल भरपूर जिएं
नफरत ंवैमनस्य और बदले की भावना
में  कुछ नहीं  रखा है प्यारों ।
|||||||  नीति अग्निहोत्री
५७सांई विहार इन्दौर|| म प्र

1 comment:

  1. Good morning,
    Bahot bahot hi jordar aur achha post kiya hai.
    Congratulations.
    With best Compliments.

    ReplyDelete

Featured Post

हिंदी पखवाड़े पर इंदौर संघ लेखिकाओ के पसंदीदा पुस्तकों पर विचार

एक सच्चा रिश्ता एक अच्छी किताब की तराहा होता है,  कितनी भी पुरानी हो जाए, फिर भी शब्द नहीं बदलते, रास्ते बहुत मिलेंगे भटकाने के लिए, लेकिन स...