वीरांगना
पहनती थी चूड़ियां।
पर काल का रुप थी।
वीरांगना भारत की।
नारी शक्ति गजब थी।
बनो फिर से चंडिका।
मिथ्या भ्रम तोड़ कर।
आओ रण में फिर से।
कोमलता छोड़कर।
पिशाच बने पुरुष।
रक्षा अब कौन करे।
नर बने निशाचर।
देश बदनाम करे।
भेड़िया कहे इनको।
राक्षस से क्रूर बने।
नवयुवक देश के।
रक्षक नही भक्षी बने।
धिक्कार धिक्कार आज।
भारत माता कहती।
ऐसे कपूतो को कैसे??
जननी नही सहती।
🙏 माया ( नारायणी )
२९---२--२०२०

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