Friday, February 21, 2020


आज मात्रभाषा दिवस की आप सभी को शुभकामनाएँ । चूंकि हमारी  मात्रभाषा हिन्दी है तो हमारी सारी क्रियाएँ  हिन्दी में ही होती है । हम हिन्दी को ओढ़ते बिछाते हैं ,हिन्दी में कल्पना करते हैं और हिन्दी में ही स्वप्न भी देखते हैं । कुछ यही भाव लिए हुए यह रचना देखिये-


  *हिन्दी अभिव्यक्ति*

जब भी सोचा भीतर से
आवाज़ है आई हिन्दी में

चोट लगी तब दर्दीली-सी
आह भरी वो हिन्दी में

नतमस्तक हो प्रभु के सम्मुख
विनय करी थी हिन्दी में

सपनों में थी स्वर्ण-पंख
उन्मुक्त उड़ानें हिन्दी में

भावावेश में बोल कटीले
मुख से निकले हिन्दी में

मारे भय के रक्षा की
गुहार लगाई हिन्दी में

मीठी लोरी गाकर लालन
को दुहराया हिन्दी में

पिया मिलन की आस रसीली
मन इठलाया हिन्दी में

विरह-शोक संतप्त हृदय का
करुण था रूदन हिन्दी में

अंतस् से सोते फूटे थे
शुभाशीष के हिन्दी में

श्वासोच्छ्वास भी हिन्दी में
और जीते-मरते हिन्दी में

आत्मा की भाषा हिन्दी में
और आत्मा बसती हिन्दी में

*वंदना दुबे*

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