कविता
*अकेले*
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*साथ छोड़ चुका जग अपना।*
*तन्हा हैं, हम इस जग में।*
*जीवन जिसके नाम गवाया,।*
*वह खोए हैं,अपने रंग में।*
*मासूमो को किलकारी को*
*बाहों के झूले में झुलाया*।
*वह खो गये अपनी दुनियॉ में*
*हमारी सिसकिया खो गई।*
*अब उनके ठहाको में।*
*हम तुम ही बस साथ रहे।*
*बनके सहारा एक दूजे का।*
*आपस मे विश्वास रखें।*
*हम भीड़ में खो ना जाए*
*हाथ थामले एक दूजे का।*
*चलो हम-तुम अब साथ जी ले।*
*करवट बदलती जिंदगी में।*
*इस अकेले पन के हमराज बने।*
*चलो हम-तुम अब साथ रहे।*
*दर्द बाटले एक दूजे का।*
*थोड़ा तुम सो लो।*
*थोड़ा में सो लू।*
*ढ़लती शामों के हमराह बने।*
*वन्दना पुणतांबेकर*🌹🌹

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