Sunday, February 2, 2020

नीति अग्निहोत्री 
वृद्धावस्था पर एक कविता
|||||||||| पतझर।।।।।।
पतझर ऐसा शब्द है जो मन में नकारात्मकता पैदा करता है
पतझर का स्वरूप आंखों के सामने
तैरने लगता है और सहानुभूति उपजती है
उन पेड़ों के प्रतिजो अपनी शान यानि
हरियाली धीरे धीरे  खो देंगे ।
पेड़ झेल जाते हैं यह लाचारी क्योंकि
जानते हैं यह तो क्षणिक अथवा कुछ
समय का है और नयी कोंपलें आएंगी
पुनः नया ॠंगार होगा उनका ।
यही सकारात्मक भाव पेडों को
जिन्दा रखता है ं परन्तु
उन संतानों का क्या जो मां ॒बाप
को अकेला छोड़ विदेश के लिए
प्रस्थान कर उनके जीवन को पतझर
स्थाई रूप से सौंप जाते हैं ।
उनके मन की हरियाली अपने
हाथों से सौंप जाते हैं और मां ॒बाप
निरे ठूंठ  से कैसे जीते हैं क्या
नौनिहालों ने कभी सोचा है ॽ
मां ॒बाप का कुसूर इतना ही तो था
कि उन्होंने दिन ॒रात एक कर के
बच्चों को इस लायक बनाया कि वे
शान और मान से जी सकें ।
आज जब बच्चे ऐसाअसहाय सा
छोड़ जाते हैं तो भी उन्हें कोई
गिला ॒शिकवा नहीं होता परन्तु शाम
को घर में बनाए घोंसले में
चिड़िया को अपने बच्चों से मिलते
देख कर उनके मन की कोंपलें
मुरझा जाती हैं और एक वीतरागता
मन को घेर लेती है ।
|||||| नीति अग्निहोत्री
५७सांई विहार इन्दौर म ं प्र।

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