आम बौर से लदे तो मन प्रफ्फुलित हो गया खूब आम खायेगे बांटेगे अमिया बनाएंगे फिर आंधी तूफान आये बौर
झड़ गए इस प्राकृतिक घटना पर उदास भी नही हो सकते। चुनाव आते ही ऐसे ही वादों की बहार आती है।
जनता मतदान कर आती है फिर दौर शुरू होता है बहानो, विदेशी दौरों, धन की। कमी,पिछली सरकारों को कोसने
का बौर के झड़ने की तरह ।मोहभंग होता,और सारे अरमान आंसूओ में बह जाते
उम्र के एक पड़ाव पर वेलेंटाइन पर कुछ दिया तो नहीं पर मैं बहुत थक के सो जाऊं और ये खुद खाना गर्म कर
खालें बर्तन समेट के पीछे रख दे आधी रात को नीँद खुली देखा टेबल पे एक नोट था आज तो वेलेंटाइन दिवस है
सुख से दुखी थी
*शांता पारीख
झड़ गए इस प्राकृतिक घटना पर उदास भी नही हो सकते। चुनाव आते ही ऐसे ही वादों की बहार आती है।
जनता मतदान कर आती है फिर दौर शुरू होता है बहानो, विदेशी दौरों, धन की। कमी,पिछली सरकारों को कोसने
का बौर के झड़ने की तरह ।मोहभंग होता,और सारे अरमान आंसूओ में बह जाते
उम्र के एक पड़ाव पर वेलेंटाइन पर कुछ दिया तो नहीं पर मैं बहुत थक के सो जाऊं और ये खुद खाना गर्म कर
खालें बर्तन समेट के पीछे रख दे आधी रात को नीँद खुली देखा टेबल पे एक नोट था आज तो वेलेंटाइन दिवस है
सुख से दुखी थी
*शांता पारीख


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