Friday, February 14, 2020

आम बौर से लदे तो मन प्रफ्फुलित हो गया खूब आम खायेगे बांटेगे अमिया  बनाएंगे फिर आंधी तूफान आये बौर

झड़ गए इस प्राकृतिक घटना पर उदास भी नही हो सकते। चुनाव आते ही ऐसे ही वादों की बहार आती है।

जनता मतदान कर आती है फिर दौर शुरू होता है बहानो, विदेशी दौरों, धन की। कमी,पिछली सरकारों को कोसने

का बौर के झड़ने  की तरह ।मोहभंग होता,और सारे अरमान आंसूओ में बह जाते


उम्र के एक पड़ाव पर वेलेंटाइन पर कुछ दिया तो नहीं पर मैं बहुत थक के सो  जाऊं और ये खुद खाना गर्म कर

खालें बर्तन समेट के पीछे रख दे आधी रात को नीँद खुली देखा टेबल पे एक नोट था आज तो वेलेंटाइन दिवस है

सुख से दुखी  थी

*शांता पारीख

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