प्रेम सदा से है पाकीजा
ज्यों-ज्यों उतरा,त्यों -त्यों डूबा।
सारे जहाँ के गम भूलकर
थाम तू मेरा दामन फिर सो जा।
तेरी नींद में खलल पड़े ना
पाँव भी न हिलाऊँ,तुम मेरे
जन्मों के साथी कैसे तम्हे सताऊं?
सोच रहा हूँ उम्र हो चली
चला चली की बेला है
न जाने किसके खाते
रहना लिखा अकेला है
जब तक सांस तब तक आस
वक्त यहीं ठहर जाए यही
है उस रब से अरदास
रश्मि लता मिश्रा
बिलासपुर,सी,जी
ज्यों-ज्यों उतरा,त्यों -त्यों डूबा।
सारे जहाँ के गम भूलकर
थाम तू मेरा दामन फिर सो जा।
तेरी नींद में खलल पड़े ना
पाँव भी न हिलाऊँ,तुम मेरे
जन्मों के साथी कैसे तम्हे सताऊं?
सोच रहा हूँ उम्र हो चली
चला चली की बेला है
न जाने किसके खाते
रहना लिखा अकेला है
जब तक सांस तब तक आस
वक्त यहीं ठहर जाए यही
है उस रब से अरदास
रश्मि लता मिश्रा
बिलासपुर,सी,जी

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