Thursday, February 13, 2020

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भारत भविष्य का ताज
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श्रेष्ठ भारत भारत भविष्य का ताज पहनाया था मिलकर,
सोचा था देश प्रगति करेगा,भारत की जमीं पर भेदभाव नहीं होगा।
अमन चैन की छांव तले बैठेथे हम  सब
अच्छे दिनों की सौगात, सबका साथ सबका विकास होगा।

यहां कभी सोचा नहीं था, उनके वादे इरादे बदल जायेंगे,
यहां नहीं जानते थे कथनी-करनी में इतनी जल्दी अमल होगा।
बुद्धिजीवी और आमजन तो समझ भी नहीं सकें उनके आचरण को,
देश को झोंक दिया अराजकता में सोचा भी नहीं था चार दिवारों में हमारे कानून भी विफल होगा।

हवाओं में ज़हर है, उनकी मिठास में ज़हर घूल गया है,
रगंत भी अब पिंकी नजर आ रही है, महंगाई की मार, बेरोजगारी की मार, युवा भटक रहा है,छात्रौ पर अत्याचार हमारी भारतीयता पर अठहांस कर रहा है।
एन सी आर सी ए ए में समाज और राष्ट्र उलझकर रहें गये है।

खामौस क्यौ है,प्रश्चीन, गगन कहां गए कर्णदार , राष्ट्र निर्माता झुकने नहीं दूंगा टुटने नहीं दूंगा भारत को  बिकने नहीं दूंगा, देश के जवानों किसानों को मरने नहीं दूंग मोदी हैं तो सब मुमकिन है यही कहा था जनता से धोखा किया दिल्ली की हार ने उजागर कर दिया है।

               सृजनहार
गगन खरे क्षितिज कोदरिया मंहू मध्य प्रदेश इन्दौर लेखक संघ आ भा साहित्य परिषद मंहू साहित्य मित्र मण्डल कोदरिया मंहू

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