Friday, February 14, 2020

14 फरवरी 2020

पुलवामा दिवस पर एक श्रद्धांजलि

विधा- पद्य (कविता )
शीर्षक -"है नमन मेरा जवानों को "

नमन है देश के उन जाँबाजों को
कर दिया कुर्बान देश के लिए जाँ को
शहीदों की शहादत कैसे सकते भूल
हजारों बेनामों का समर्पण
बना गया दुश्मनों के दिल का शूल।।

दो हज़ार उन्नीस में पुलवामा जिले में
हुई थी एक बड़ी कायराना हरकत
14 फरवरी के दिन आतंकियों ने
कर दिया शर्मनाक अमानवीय कृत्य।।

सीआरपीएफ के वाहनों पर
अचानक किया आतंकी हमला
आईईडी ब्लास्ट करके
40 जवानों को मार डाला ।।

इस आत्मघाती हमले से
पूरा देश रह गया स्तब्ध
हर एक भारतवासी था
उस दिन दुखी और क्षुब्ध
जैश ए मोहम्मद ने ली
इस जघन्य कृत्य की जिम्मेदारी
हताश हो कुछ ना कर सका
तो पीछे से मारी हम पर कटारी।।

ये थे हमारे देश प्रेमी
कर रहे थे निस्वार्थ सेवा
पूरा वतन एकजुट हो
प्रगट कर रहा था संवेदना
आतंकवाद को हमें अब
नेस्तनाबूद करना ही होगा
घृणित कृत्य करने वालों को
जड़ से उखाड़ना ही होगा ।।

हम आतंकी और बुरी ताकतों के खिलाफ हरवक्त एकजुट हैं
जब जब ऐसा होगा तो
उन्हें तोड़ने को हम अटूट हैं
हमारा हर एक जवान
ग्यारह सौ के समतुल्य है
विश्व की निर्णायक प्रतिक्रिया
की सबको सख्त जरूरत है ।।

उन्हीं की बदौलत आज
ज़िंदा दिखाई देते हैं हम लोग
खुली फिज़ा में साँस लेते हैं
बिस्तर पर  चैन से सोते हैं हम लोग
साहस के उनको हमारे
हैं हजारों-हज़ारों सलाम
ज़िंदा रहोगे यादों में हमारी
ओ शहीदों, बेनाम और गुमनाम।।

स्वरचित
उषा गुप्ता
इंदौर

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