शीर्षक हूआं नीड़ सूना ।
विधा कविता ।
लुट गया मधुवन .
हुआं वो नीड़ सूना ।
अब ना माली के ,
हर्दय का घाव छूना ।
मधुप कलियों को ,
चले जाकर रुलाकर ,
उड़ ग ई कोकिला
अधूरा गीत गाकर ,
जब ना होगा नीर ,
सरिता क्या बहेगीं
मीन जल से बिछुड़कर ,
कैसे रहेगीं ।
लहरियां तट को ,
जाती झुलाकर ,
उड़ गयीँ कोकिला ,
अधूरा गीत गाकर ।
कोन तुम अंजान ,
बन मेहमान आयें ,
स्वपन मे दो गीत ,
जीवन के सुनायें ।
चल दिये क्यों नींद ,
मेरी अब चुराकर ,
उड़ गयी कोकिला ,
अधूरा गीत गाकर ।
लुट गया उपवन ,
हुआं वो नीड़ सूना ।
अब ना माली के ,
हर्दय का घाव छूना ।
मनोरमा जोशी ।🙏🏻
विधा कविता ।
लुट गया मधुवन .
हुआं वो नीड़ सूना ।
अब ना माली के ,
हर्दय का घाव छूना ।
मधुप कलियों को ,
चले जाकर रुलाकर ,
उड़ ग ई कोकिला
अधूरा गीत गाकर ,
जब ना होगा नीर ,
सरिता क्या बहेगीं
मीन जल से बिछुड़कर ,
कैसे रहेगीं ।
लहरियां तट को ,
जाती झुलाकर ,
उड़ गयीँ कोकिला ,
अधूरा गीत गाकर ।
कोन तुम अंजान ,
बन मेहमान आयें ,
स्वपन मे दो गीत ,
जीवन के सुनायें ।
चल दिये क्यों नींद ,
मेरी अब चुराकर ,
उड़ गयी कोकिला ,
अधूरा गीत गाकर ।
लुट गया उपवन ,
हुआं वो नीड़ सूना ।
अब ना माली के ,
हर्दय का घाव छूना ।
मनोरमा जोशी ।🙏🏻

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