ओम नमः शिवाय🙏🙏🙏
शिवजी को कहते है त्रिलोचन
तीन नेत्रों में है सत्व, रज,तम
स्वर्ग ,मृत्यु या हो पातल
सभी पर है शिवजी का राज
मन , बुद्धि,वाणी का दोष
उपासना से मिट जाते है सभी क्लेश
आपके तन पर लगी है भस्म
नश्वर देह का है ये प्रतीक
शिवजी की जटाओं में गंगा समाहित
आपके गले में सर्प विराजित
पृथ्वी से आकाश तक
अन्धकार से प्रकाश तक
बेलपत्र से पलाश तक
आदि से अनंत तक
जीवन से मृत्यु तक
देवता राक्षस के अधिपति
सृष्टि में समाए कैलाशपति
सिर पर चंदमा का वास
चहुं ओर फैला प्रकाश
सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करते
वरदानों से झोली भर देते🙏🙏🙏
*पूनम शर्मा
शिवजी को कहते है त्रिलोचन
तीन नेत्रों में है सत्व, रज,तम
स्वर्ग ,मृत्यु या हो पातल
सभी पर है शिवजी का राज
मन , बुद्धि,वाणी का दोष
उपासना से मिट जाते है सभी क्लेश
आपके तन पर लगी है भस्म
नश्वर देह का है ये प्रतीक
शिवजी की जटाओं में गंगा समाहित
आपके गले में सर्प विराजित
पृथ्वी से आकाश तक
अन्धकार से प्रकाश तक
बेलपत्र से पलाश तक
आदि से अनंत तक
जीवन से मृत्यु तक
देवता राक्षस के अधिपति
सृष्टि में समाए कैलाशपति
सिर पर चंदमा का वास
चहुं ओर फैला प्रकाश
सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करते
वरदानों से झोली भर देते🙏🙏🙏
*पूनम शर्मा

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