Friday, February 14, 2020

सृष्टि की संरचना को

--- परिभाषित करते तुम और हम ,

जीवन - संध्या का पड़ाव ये ,

पार करें हम , संबल बन एक दूजे के ,

क्यों बांधें प्रेम को हम शब्दों के जाल में ,

होता अभिव्यक्त अनुराग यहां ,

हृदय - तल की गहराइयों से ,

शब्द होतें यहां -- मौन

*शालनी रायजादा

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