Friday, February 14, 2020

पुलवामा के शहीदों   की पहली वर्षी पर  मेरे संग देश का नमन

 जयहिंद के  निशान

देश के गद्दारों की खाट खड़ी कर डालो
पनाहगारों के भेड़ियों को मार डालो
प्रेम  पर्व पर मसले गए चालीस गुलाब
जयचंदों ने  जख्मी किए शौर्य आफताब ।

छुट्टी से लौट घर पर  वादा कर  मिलने का
निकला फिर  सैन्य  काफ़िला देश सेवा  का
तभी मचाया जैश आतंकी दरिंदों  ने कहर
शहीदों की शहादतों से मौन गया ठहर ।

वीर शहीदों की शहादत पर रोष  फूटा
खूनी फाग देख भारत माँ का दिल टूटा
थर्राया पुलवामा का अवंतीपोरा
उड़ा गया  धड़ , बाँह था वह आतंकी छोरा ।


 अमित , अमर , अजीत,  श्याम , रमेश  का दो जवाब
वीरों के बलिदान से देश जिंदा है जनाब
देश की सुरक्षा में आठों प्रहर खड़े जवान
मौत कफ़न सिर पर बाँध देते अपनी जान ।

कयामत के ट्रकों में लिपटे तिरंगे में शव
पहुँचे अजीज अपने  शहर , गाँव   घर - द्वार जब
था वह माँ - पिता ,  पत्नी की आँखों का तारा
था बुढ़ापे की लाठी का  इकलौता सहारा ।

देखा  लाल को जब माँ ने आँसू  थमे नहीं
मिटी माँग , टूटी चूड़ी , बिखरा मंगल सूत्र वहीं
नादानों को पता नहीं दादा , माँ  क्यों रोते
 हुए  यतीम मासूम न जाने पिता क्या होते ।

शौर्य , साहस , जज्बे की कहानी  बन  गए
   देशभक्ति , राष्ट्रहित हेतु जवानी दे गए
 अमर जवान ज्योति बन जग में रहे चमक
   रण स्तम्भ बनके हर  धड़कनों में रहे महक

 व्यर्थ न जाने देगा देश उनका बलिदान
पाक की भाषा में देगा  जवाब हर जवान
तिरंगे की शान के खातिर हुए वे कुर्बान
भारत के वीरों को करे  " मंजु " नमन जहान  ।
 डॉ. मंजुगुप्ता
वाशी , नवी मुंबई
फोन 9833960213
writermanju@gmail.com

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