Friday, February 21, 2020

शरद ऋतु अभी पूरी तरह से विदा नही हुई है सूरज अभी बादलों की चादर ओढ़े सो रहा है , वातावरण में हल्की ठंडक घुली हुई है ।
ओम नमः शिवाय स्वर लहरियां कानों में पड़ी , समय देखा सुबह के पांच बजे थे , पर्दा हटा कर देखा  बाहर अंधेरा था ।
करीब बीस - तीस लोगों का एक समूह हाथों में मंजीरे और ढोलक लिए गर्म कपड़ों में लिपटे एक दुसरे के सुर में सुर मिलातें ताल की थाप पर झुमतें गाते चलें जा रहें थें ।
वातावरण में एक अतुलनीय शांति रच बस गयी प्रतीत हो रही थी , लगा उस शिव और सत्य के दर्शन हो गए जिसकी तलाश में हम कहाँ कहाँ नही फिरतें ।
उस सत्य और शिव के आलोक ने मन और मस्तिष्क का भी इस सत्य से परिचय कराया कि ------ सहजता और सरलता में ईश्वर का वास है हम जितनें आडम्बरहीन होगें उस परम परमात्मा के उतने ही पास होगें , आत्मिक शांति से भरे हुयें होगें । तभी हमें सर्वत्र शिवाय के दर्शन भी हो पायेगें । 🙏🙏

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